जम्मू कश्मीर के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) दिलबाग सिंह ने कहा कि सीमा पार से घुसपैठ की घटनाओं में बेहद कमी आ गई है। राजोरी, पुंछ के बाद बारामुला और कुपवाड़ा में घुसपैठ को नाकाम किया गया और कुछ दहशतगर्दों को मार गिराया गया। घाटी में पत्थरबाजी भी खत्म हो गई है।
घाटी में आयोजित एक कार्यक्रम में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि मौसम बदल रहा है। आगे ठंड और बर्फबारी में उस तरफ से आना मुश्किल हो जाता है इस वजह से पाकिस्तान की कोशिश रहती है कि इस समय ज्यादा से ज्यादा दहशतगर्दों को इस तरफ भेजा जाए।
हमारे बॉर्डर पर बैठे सुरक्षाकर्मी पूरी तरह से घुसपैठ को रोकने के लिए मुस्तैद हैं। इसके बावजूद कुछ घुसपैठी इस पार आ घुसे और कई मारे भी गए। कई आतंकियों की तलाश जारी है। इस साल 40 से अधिक विदेशी आतंकियों के मारे जाने पर दिलबाग सिंह ने कहा कि ज्यादातर लश्कर और जैश के आतंकियों की कमांड पाकिस्तान अपने हाथ में रखता है।
हमारी कोशिश है कि बाहरी दहशतगर्द जो जम्मू-कश्मीर के लोगों को नुकसान पहुंचाते हैं और युवाओं को आतंक की तरफ ले जाते हैं उन्हें रोका जाए। उन्होंने कहा कि हमारे पास जानकारी है कि कुछ आतंकी पाकिस्तान से इस तरफ घुसपैठ कर चुके हैं जिनकी तलाश जारी है।
जम्मू में कई जगह आईईडी मिलने के सवाल पर कहा कि यह पाकिस्तान की एक सोची समझी साजिश है। अब रेडीमेड आईईडी पाकिस्तान द्वारा इस्तेमाल की जा रही है। जम्मू में भी इस तरह की आईईडी का इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन इनको इस्तेमाल किए जाने से पहले ही बरामद कर लिया गया।
उन्होंने कहा कि अब पत्थरबाजी घाटी में खत्म हो गई है। घाटी के लोग जान गए हैं कि पत्थरबाजी अपने ही लोगों का नुकसान करती है और इसका सारा श्रेय घाटी के लोगों को ही जाता है।