श्रीनगर। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा है कि ऑल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस (एपीएचसी) के अध्यक्ष मीरवाइज मौलवी उमर फारूक न ही नजरबंद हैं और न कैद। उनके अगल बगल उनकी सुरक्षा के लिए पुलिस को तैनात किया गया है। वहीं जम्मू कश्मीर के क्षेत्रीय दलों के नेताओं ने एलजी के बयान को नकारा है। साथ ही एपीएचसी ने भी इसका खंडन किया है।
दरअसल एलजी सिन्हा ने हाल ही में दिए गए एक इंटरव्यू में कहा कि किसी भी राजनीतिक कार्यकर्ता, सामाजिक कार्यकर्ता या धार्मिक नेता को हमने जेल में नहीं रखा है। एलजी ने कहा, मीरवाइज मौलवी उमर फारूक पर 2019 में भी पीएसए नहीं लगा था। वह कैद नहीं किए गए हैं। पिछली घटनाओं पर नजर डालें तो उनके पिता की भी दुर्भाग्यपूर्ण ढंग से हत्या कर दी गई थी। मुझे लगता है कि उनके अगल बगल पुलिस को हम इसलिए रखते हैं कि ताकि वो सुरक्षित रह सकें। वह खुद तय करें कि वो करना क्या चाहते हैं। हमारी ओर से न वो नजरबंद हैं, न कैद हैं।
----------
जिस तरह मेरे साथियों को बंद किया, उसी तरह यहां भी ट्रक खड़े किए
वहीं उमर अब्दुल्ला ने एलजी के इंटरव्यू में दिए गए बयान को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए अपने ट्विटर हैंडल पर ट्वीट में लिखा, जिस तरह 4 अगस्त, 2019 को मेरे साथियों को महीनों के लिए उनकी सुरक्षा के लिए घरों में बंद कर दिया गया था और उसी तरह हम हर बार अपने गेट के बाहर ट्रक खड़े करवाते हैं, क्योंकि ‘इनपुट’ से पता चलता है कि गुपकार रोड पर हमले का खतरा है। पीपुल्स कांफ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद लोन ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी और ट्वीट कर कहा, मुझे लगता है कि एलजी साहब को तथ्यों की पुष्टि करने की जरूरत है।
-----------
एपीएचसी ने कहा-मस्जिद भी नहीं जाने दिया जाता
एपीएचसी ने एलजी मनोज सिन्हा द्वारा दिए गए वीडियो बयान पर आश्चर्य व्यक्त किया। कहा कि तथ्यों की इस तरह की गलत बयानी और उसे कैद से इनकार करना अविश्वसनीय है। उन्होंने कहा कि मीरवाइज होने के नाते उन्हें शुक्रवार को जामिया मस्जिद जाने से भी रोका जाता है, जो कि जम्मू-कश्मीर में सदियों पुरानी परंपरा है। उन्होंने यह भी कहा कि करीबी रिश्तेदारों को छोड़कर किसी को भी घर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं है। इन तथ्यों को कैसे नकारा जा सकता है।
------------------