केरन सेक्टर (कुपवाड़ा)। नियंत्रण रेखा पर तैनात हवलदार अमित ने बताया कि रात के पेट्रोलिंग के साथ-साथ संतरी ड्यूटी को भी बढ़ाया जाता है। पारंपरिक घुसपैठ का रास्ता होने के चलते बर्फ पिघलने के साथ ही उस पार बैठे आतंकियों की यह कोशिश रहती है कि ज़्यादा से ज़्यादा इस पार आ सकें, लेकिन इस बार अभी तक ऐसा कुछ देखने को नहीं मिला है, क्योंकि जवान पहले से भी पूरी तैयारी के साथ सतर्क हैं। अत्याधुनिक हथियार और सर्विलांस के कारण घुसपैठ आसान नहीं रह गई।
एक अन्य जवान उमेश कौशिक के अनुसार हमारे पास आधुनिक हथियार और सर्विलांस उपकरण हैं जिससे हम आतंकियों के नापाक मंसूबों को नाकाम बनाते हैं। जब कभी इनपुट रहता है तो हम चौकसी और बढ़ा देते हैं। केरन में सब से ज्यादा सतर्कता बरती जा रही है, क्योंकि बताया जा रहा है कि उस पार नीलम घाटी में सब से ज्यादा लांच पैड हैं।
----------------
तीस सालों में पहली बार आतंकियों की संख्या 200 के कम
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले वर्ष केवल 5 घुसपैठ की कोशिशें हुई हैं, जिनमें से 3 को असफल कर दिया गया था और जो घुसने में सफल रहे उन्हें बाद में मुठभेड़ों में ढेर कर दिया गया। आतंक विरोधी अभियानों के कारण तीस सालों में पहली बार जीवित आतंकियों की संख्या 200 से कम हुई है। पिछले वर्ष 184 आतंकी मारे गए थे। इस वर्ष की बात करें तो जनवरी से लेकर अब तक आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच 40 मुठभेड़ हुई हैं जिनमें 59 आतंकी ढेर किए गए हैं और 30 को जिंदा पकड़ा गया है। इसके अलावा अब तक 169 आतंकी समर्थक पकड़े गए हैं।
------------
लोग बोले, सेना हर मुसीबत में मददगार
केरन सेक्टर के करीब रहने वाले स्थानीय लोगों का कहना है कि सेना न हो तो उनकी जिंदगी कुछ भी नहीं है। स्थानीय निवासी राजा सुहेल अहमद खान ने कहा, हम सेना के शुक्रगुजार हैं जो चौबीस घंटे किसी भी मुसीबत में सेना मदद करती है। कई बार बर्फबारी में सड़क बंद होने के चलते सेना हमारे मरीज को कंधे पर उठाकर अस्पताल पहुंचाती है। पहले जब गोलाबारी होती थी तो सेना लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाती थी।