श्रीनगर। पासपोर्ट नवीनीकरण के लिए दी गई अर्जी खारिज होने के बाद पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने बुधवार को ट्विटर पर लिखा कि मौलिक अधिकारों के हनन को लेकर अब आम आदमी कहां जाए?
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने महबूबा की पासपोर्ट प्राधिकरण को निर्देश देने संबंधी याचिका को खारिज कर दिया था। बुधवार को ट्विटर पर महबूबा ने लिखा कि मौलिक अधिकारों का हनन होने पर न्यायपालिका ही एकमात्र सहारा बचा है, लेकिन भाजपा के शासन में जब अदालतें भी इस जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लें तो कोई कहां जाए।
महबूबा मुफ्ती को लिखे पत्र में क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय ने 26 मार्च को एक नकारात्मक सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर उनके पासपोर्ट के लिए आवेदन को अस्वीकार कर दिया था। क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय ने मुफ्ती की मां के पासपोर्ट के लिए आवेदन को भी खारिज कर दिया है।
सेना पर भी खड़े किए सवाल
महबूबा ने एक अन्य ट्वीट में आरोप लगाया कि आरआर कैंप देवसर से सेना ने उनके चाचा और पार्टी के वरिष्ठ नेता सरताज मदनी के घर पर छापा मारा, जो पिछले साल दिसंबर से हिरासत में हैं। यह शर्मनाक और नियमों व आचार संहिता का उल्लंघन है।
आतंकियों की मौजूदगी की सूचना पर चलाया था कासो
महबूबा के ट्वीट के बाद सेना ने कहा कि 29 व 30 मार्च की रात को विस्सू गांव के नजदीक आतंकियों की मौजूदगी की महत्वपूर्ण जानकारी मिलने के बाद इलाके में तलाशी अभियान चलाया गया था।
महबूबा ने ममता बनर्जी को लिखा पत्र
पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से बातचीत होने के बाद ममता को पत्र लिखा है। महबूबा ने कहा कि ममता दीदी भी केंद्र सरकार के हथकंडों को लेकर शंकित हैं। संघीय ढांचे को बर्बाद करने वाली केंद्र की भाजपा सरकार मनमर्जी के बिल पास कर रही है, जिसके खिलाफ विपक्ष को एकजुटता दिखानी होगी। जम्मू-कश्मीर को खुली जेल बना दिया गया है। सभी को मिलकर लोकतंत्र विरोधी केंद्र के खिलाफ लड़ना होगा।