भारत-पाकिस्तान के बीच डीजीएमओ स्तर पर संघर्षविराम समझौते का नेशनल कांफ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने स्वागत करते हुए बुधवार को कहा कि अब दोनों देशों की बदली हुई सोच से जम्मू-कश्मीर में शांति आएगी।
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उमर ने पार्टी कार्यालय में कार्यकर्ताओं से कहा कि दोनों देशों के नए दृष्टिकोण से जम्मू-कश्मीर के प्रति एक बदले हुए मन का संकेत मिलता है। उन्होंने कहा कि इस समझौते ने यह स्पष्ट कर दिया है कि दोनों देशों के दृष्टिकोण में बड़ा बदलाव आया है। यह स्वागत योग्य कदम है और इसे सकारात्मक रूप से आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमने समय-समय पर देखा कि कैसे दोनों देश डीजीएमओ स्तर पर एलओसी, आईबी पर हिंसा की समाप्ति पर बात करते हैं। परंतु हालिया कदम बिल्कुल चौंकाने वाले हैं।
उमर ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में हमें अपनी पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाने पर अधिक ध्यान केंद्रित करना होगा। महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के बिना पार्टी को मजबूत बनाने के विचार को अंजाम नहीं दिया जा सकाता। उन्होंने कहा, डीडीसी चुनावों से पता चलता है कि पार्टी की जड़ें कितनी गहरी हैं, लेकिन दूसरी ओर विभिन्न संगठनात्मक खामियां भी सामने आई हैं, जिन्हें किसी भी हाल में नहीं छोड़ना चाहिए।
नेकां( नेशनल कांफ्रेंस) ने जम्मू-कश्मीर में सुन्नी और शिया संप्रदायों के लिए दो अलग-अलग वक्फ बोर्डों की स्थापना संबंधी केंद्रीय मंत्री की घोषणा का विरोध किया, कहा कि यह मुस्लिम समुदाय के धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप है।