उन्होंने स्थानीय लोगों के साथ संपर्क बनाए रखने के महत्व पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि इस संवाद ने कई घुसपैठ की कोशिशों को नाकाम करने में मदद की है। साथ ही, उन्होंने ये भी बताया कि घाटी में कुछ आतंकवादी घटनाएं ऐसी भी हैं, जहां अप्रशिक्षित व्यक्तियों ने पिस्तौल का इस्तेमाल किया है।
जब सुरक्षाबलों की तैनाती में कटौती के बारे में सवाल किया गया, तो ले. जनरल घई ने कहा कि वर्तमान स्थिति में आतंकवाद विरोधी अभियानों को कमजोर करने की कोई सिफारिश नहीं की जा सकती। उन्होंने स्पष्ट किया कि हमें और अच्छे सालों की आवश्यकता है ताकि हम मौजूदा आतंकवाद विरोधी ग्रिड को मजबूत कर सकें।
जम्मू में आतंकवाद के पैटर्न में बदलाव की बात करते हुए, जीओसी ने कहा कि काउंटर इंफिल्ट्रेशन ग्रिड मजबूत है और कई घुसपैठ के प्रयासों को विफल किया गया है। उन्होंने बताया कि जम्मू में शांति बनी हुई है, जो कि सुरक्षा बलों की सफलता का प्रतीक है।
15 अक्टूबर को ले. जनरल प्रशांत श्रीवास्तव जीओसी के रूप में कार्यभार संभालेंगे, जबकि ले. जनरल घई एक नई शुरुआत के लिए कोर को छोड़ रहे हैं। उनका मानना है कि सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने इस क्षेत्र को सभी के लिए सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कश्मीर में स्थायी शांति के लिए अभी और मेहनत करने की आवश्यकता है, लेकिन वर्तमान में स्थिति संतोषजनक है।