जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने दिव्यांगों की गवाही दर्ज किए जाने संबंधी दिशा-निर्देश किए जारी
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने दिव्यांगों की गवाही दर्ज किए जाने संबंधी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सभी अदालतों व किशोर न्याय बोर्डों के पीठासीन अधिकारियों को दिव्यांगों के मामलों का निपटारा प्राथमिकता से करने को कहा गया है ताकि दिव्यांगों को बार-बार अदालत में हाजिर न होना पड़े। कोर्ट ने कहा है कि दिव्यांगों की गवाही को ब्रेल लिपि में भी लिखा जा सकता है।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी बीएनएसएस की धारा 313 के अनुपालन में हाईकोर्ट ने यह कदम उठाए जा सकने की बात कही है। ऐसा इसलिए किया जा सकता है ताकि ऐसा गवाह किसी अन्य व्यक्ति पर निर्भर न रहे।
हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल एमके शर्मा की ओर से जारी निर्देशाें में कहा गया है कि गवाही दर्ज करने के लिए एक आयोग भी नियुक्त किया जा सकता है।अदालतें संबंधित जिला विधिक सेवा प्राधिकरण यानी डीएलएसए के जरिये दिव्यांग व्यक्तियों को मुकदमे से पहले प्री-ट्रायल सहायता भी प्रदान कर सकती हैं।
दिव्यांगता के आधार पर रिकॉर्ड होंगे साक्ष्य
साक्ष्यों को दिव्यांगता के आधार पर रिकॉर्ड किया जाएगा। यदि कोई गवाह सुन नहीं सकता तो उसके साक्ष्य सांकेतिक भाषा, दुभाषिया के जरिये रिकॉर्ड होंगे। दृष्टि बाधित दिव्यांग ऑडियो रीडिंग, ब्रेल, स्क्रीन रीडर के साथ अपने बयान दर्ज करा सकेगा। जहां तक संभव होगा ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी। कोर्ट सुनिश्चित करेगा कि प्रश्न सरल और स्पष्ट भाषा में हों। तकनीकी और कानूनी भाषा के प्रयोग से बचना होगा। ट्रायल के दौरान डराने-धमकाने, आक्रामक या भ्रमित करने वाले प्रश्नों को रोकने के लिए कार्यवाही पर नजर रखी जाएगी।
पीठासीन अधिकारी देगा प्रमाण पत्र
पीठासीन अधिकारी को दिव्यांग व्यक्ति की गवाह के रूप में जांच करने के बाद एक प्रमाण पत्र भी देना होगा। उसे आखिरी पन्ने के निचले हिस्से में लिखना होगा कि गवाह का साक्ष्य उसकी मौजूदगी में रिकॉर्ड किया गया। आवश्यक और उचित सुविधाएं प्रदान की गईं तथा निष्पक्षता सुनिश्चित की गई। बयान रिकॉर्ड करते समय सहायक व्यक्ति जैसे-(दुभाषियए, विशेष शिक्षक, देखभालकर्ता या गवाह को संवाद में सहायता करने वाले व्यक्ति की सेवाओं का इस्तेमाल किया गया।