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Srinagar News: 40 घंटे के रोल-प्ले प्रशिक्षण में मध्यस्थता का महत्व बताया

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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर न्यायिक अकादमी और जम्मू परिसरों में वकीलों एवं विशेषज्ञों के लिए आयोजित 40 घंटे का विशेष ‘’रोल-प्ले’’ प्रशिक्षण कार्यक्रम शुक्रवार को संपन्न हो गया। सर्वोच्च न्यायालय की मध्यस्थता एवं सुलह परियोजना समिति (एमसीपीसी) के तत्वावधान में जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय की मध्यस्थता एवं सुलह समिति और न्यायिक अकादमी के सहयोग से यह व्यावहारिक प्रशिक्षण पांच से नौ अक्तूबर तक आयोजित किया गया था।
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सत्र के दूसरे दिन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डॉ. जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी ने न्याय वितरण प्रणाली को मजबूत करने में मध्यस्थता के महत्व को बताया। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता केवल एक पेशेवर कौशल नहीं, बल्कि एक बेहतर इंसान और अधिक प्रभावी अधिवक्ता, लोक अभियोजक या न्यायाधीश बनने का माध्यम है। भारतीय महाकाव्यों, धार्मिक परंपराओं और कश्मीर के इतिहास का संदर्भ देते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि पवित्र कुरान का सूरह अन-निसा भी सौहार्द बहाल करने के लिए विवाद के दोनों पक्षों से प्रतिनिधि नियुक्त करने की व्यवस्था देता है, जो आधुनिक मध्यस्थता के बेहद करीब है। कार्यक्रम के समापन सत्र में उच्च न्यायालय की मध्यस्थता एवं सुलह समिति के अध्यक्ष जस्टिस रजनेश ओसवाल ने कहा कि मध्यस्थता को अंतिम उपाय नहीं, बल्कि विवाद समाधान की पहली प्राथमिकता बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सुलह की भावना हमारे दैनिक जीवन, परिवार और समाज में पहले से मौजूद है। संवाद
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