लेह। रात का अंधेरा नुब्रा के क्यागर गांव पर उतर चुका था। पहाड़ खामोश थे और तापमान शरीर को सुन्न कर देने वाली ठंड की याद दिला रहा था। इसी सन्नाटे को चीरते हुए 10 सितंबर की शाम सात बजे कुछ कदम आगे बढ़े। फिर कदम दौड़ में बदल गए। सामने 122 किलोमीटर लंबा रास्ता। ऊंचे पहाड़, पथरीले रास्ते, विरल हवा और हर मोड़ पर शरीर से ज्यादा मन की परीक्षा। यह सिल्क रूट अल्ट्रा थी।
अगली सुबह तीन बजे एक और चुनौती शुरू हुई। खारदुंग गांव से निकले धावकों के सामने 72 किलोमीटर की दूरी और 17,618 फीट ऊंचा खारदुंग ला था। यहां दौड़ना सिर्फ पैरों की ताकत का सवाल नहीं था। हर सांस पहाड़ से मुकाबिल थी। शुक्रवार को जब इन दोनों दौड़ों की फिनिश लाइन पर धावक पहुंचे तो लद्दाख की ऊंचाइयों ने सिर्फ चैंपियन नहीं चुने बल्कि कई नए रिकॉर्ड और ऐसी कहानियां भी दर्ज कीं, जिनमें जीत का मतलब पदक से कहीं बड़ा था। 477 धावकों ने इन दोनों हाई-एल्टीट्यूड अल्ट्रा रेस में हिस्सा लिया।
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नुब्रा से लेह तक नवांग की बादशाहत
सिल्क रूट अल्ट्रा में लद्दाख के नवांग त्सेरिंग ने पहली ही भागीदारी में इतिहास रच दिया। 122 किलोमीटर की दूरी उन्होंने 12 घंटे 12 मिनट 18 सेकंड में पूरी की और खिताब अपने नाम कर लिया। इस रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन के लिए उन्हें पांच लाख रुपये की प्रथम पुरस्कार राशि मिली।
नवांग के पीछे राजस्थान के जयपुर के सूरज मीणा रहे। उन्होंने 12 घंटे 35 मिनट में दौड़ पूरी कर किसी गैर-लद्दाखी धावक का अब तक का सबसे तेज समय दर्ज किया। दो लद्दाख स्काउट्स के रिगजियान ग्युरमेथ तीसरे स्थान पर रहे। विजेताओं को लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने सम्मानित किया।
जयपुर का सूरज, लद्दाख की ऊंचाइयों से भिड़ा
सूरज मीणा की कहानी भी पहाड़ों से उनके पुराने रिश्ते की अगली कड़ी है। लद्दाख की ऊंचाई के अनुकूल खुद को ढालने के लिए उन्होंने यहां एक महीने तक प्रशिक्षण लिया। दौड़ में करीब 40 किलोमीटर तक बढ़त बनाए रखी, लेकिन जैसे-जैसे ऊंचाई बढ़ी और सांस लेना मुश्किल हुआ, उन्होंने ऊर्जा बचाने के लिए रन-वॉक रणनीति अपनाई। फिर भी 12 घंटे 35 मिनट का समय निकालकर उन्होंने गैर-लद्दाखी धावक का 15 घंटे 06 मिनट का पिछला रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिया। पहाड़ों के साथ सूरज का रिश्ता दौड़ से पहले का है। 2024 में वह जयपुर से मनाली होते हुए करीब 2,400 किलोमीटर साइकिल चलाकर 12 दिनों में लद्दाख पहुंचे थे। इसके बाद कश्मीर के रास्ते लद्दाख से जयपुर तक करीब 1,500 किलोमीटर साइकिल चलाई। इस बार पहाड़ों को नापने के लिए उनके पास साइकिल नहीं, दो पैर थे।
सिल्क रूट को मिली नई रानी
महिला वर्ग में हिमाचल प्रदेश की तेनज़िन डोलमा ने 14 घंटे 26 मिनट 29 सेकंड में 122 किलोमीटर की चुनौती पूरी की। उन्होंने 2024 में बनाए अपने 17 घंटे के पुराने कोर्स रिकॉर्ड को तोड़कर खिताब अपने नाम किया। सिल्क रूट में यह उनकी दूसरी भागीदारी थी। भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली पेशेवर एथलीट तेनज़िन अपनी एक छोटी दुकान भी चलाती हैं।
सुफिया सूफी भी लौटीं :
चर्चित धावक सुफिया सूफी भी 2026 सिल्क रूट अल्ट्रा में उतरीं। महिला वर्ग में दूसरा स्थान हासिल कर उन्होंने अपनी लंबी रनिंग यात्रा में एक और अध्याय जोड़ा। लद्दाख की इस दौड़ में किसी के लिए रिकॉर्ड था, किसी के लिए पहला खिताब, किसी के लिए पुरानी हार का जवाब और किसी के लिए बेटी से किया वादा। लेकिन इन सबके बीच एक चीज समान थी और वह थी ऊंचाई से मुकाबला।