अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। लद्दाख के उच्च पर्वतीय इलाकों में पाए जाने वाले दुर्लभ औषधीय पौधों में अपार व्यावसायिक संभावनाएं छिपी हुई हैं, जो क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और स्थानीय रोजगार को नई दिशा दे सकती हैं।
केंद्र सरकार ने संसद में यह जानकारी देते हुए बताया कि लद्दाख में सीबकथॉर्न, रोडियोला, आर्टिमीसिया और एकोनिटम जैसी उच्च मूल्य वाली जड़ी-बूटियों के संरक्षण, विकास और वैज्ञानिक खेती के लिए बड़े पैमाने पर कदम उठाए जा रहे हैं। केंद्रीय आयुष मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय औषधीय पौधा बोर्ड (एमएमपीबी) और राष्ट्रीय आयुष मिशन (एनएएम) के जरिए लद्दाख में गुणवत्तापूर्ण पौध, किसानों की जागरूकता, कटाई के बाद के प्रबंधन, विपणन और गुणवत्ता जांच के लिए वित्तीय व ढांचागत सहायता दी जा रही है।
सांसद मोहम्मद हनीफा के सवालों का जवाब देते हुए केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने लोकसभा में बताया कि पिछले पांच वर्षों के दौरान राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत लद्दाख के लिए 705.11 लाख रुपये स्वीकृत कर जारी किए गए हैं। इनमें से स्थानीय प्रशासन ने 534.24 लाख से अधिक की राशि का उपयोग किया। इसके अतिरिक्त, लद्दाख में फलों और औषधीय महत्व रखने वाले सीबकथॉर्न को बढ़ावा देने के लिए लेह के नीमू में 789.33 लाख रुपये की लागत से एक विशेष सीबकथॉर्न सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया गया है। यह केंद्र डीआरडीओ के दिहार संस्थान के तकनीकी सहयोग और बागवानी विभाग के समन्वय से चलाया जा रहा है, जहाँ किसानों, महिला स्वयं सहायता समूहों और नए उद्यमियों को प्रशिक्षण तथा प्राथमिक प्रसंस्करण सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।