1 से 12 अगस्त : श्रीनगर से लगभग 70 किलोमीटर दूर कुलगाम में ऑपरेशन अखल चला था जिसमें लश्कर-ए-ताइबा का आतंकी हारिस डार मारा गया था। सबसे बड़ी सफलता 29 जुलाई को ऑपरेशन महादेव में मिली थी जब सुरक्षा बलों ने पहलगाम हमले के मास्टरमाइंड सुलेमान शाह उर्फ हाशिम मूसा समेत तीन आतंकियों को मार गिराया गया था।
नियंत्रण रेखा के पास पड़े दोनों आतंकियों के शव
गोलीबारी में मारे गए दो घुसपैठियों के शव नियंत्रण रेखा के पास देखे गए। सीमा पार से गोलीबारी के खतरे को देखते हुए अभी शव नहीं उठाए जा सके हैं। एक अधिकारी ने बताया कि घुसपैठ की कोशिश को सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया गया। फिलहाल तलाशी अभियान जारी है। मारे गए आतंकवादियों की पहचान और उनके संगठन का तुरंत पता नहीं चल पाया है, लेकिन सूत्रों ने बताया कि ये आतंकी पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से घुसपैठ की कोशिश कर रहे एक बड़े समूह का हिस्सा थे। हाल के हफ्तों में घुसपैठ की कई कोशिशों के बाद सेना ने कुपवाड़ा और नियंत्रण रेखा के अन्य सेक्टरों के अग्रिम इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है।
पिछले दो माह की बड़ी आतंकी घटनाएं
8 सितंबर : कुलगाम में ऑपरेशन गुड्डर के दौरान हुए एनकाउंटर में लश्कर-ए-ताइबा के दो आतंकी मारे गए थे। इनमें से एक शोपियां का रहने वाला आमिर अहमद डार और दूसरा विदेशी आतंकी रहमान भाई था।
26 अगस्त : गुरेज सेक्टर में दो आतंकवादी मारे गए थे। इनमें से एक की पहचान बागू खान के रूप में हुई थी जिसे ‘ह्यूमन जीपीएस’ भी कहा जाता था। वह 1995 से 100 से ज्यादा घुसपैठ की कोशिशों में शामिल था।