अय्यर ने सुझाव दिया कि भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत अटारी-वाघा सीमा पर भी हो सकती है। उन्होंने कहा कि सीमा पर ही एक टेबल लगाकर दोनों देशों के प्रतिनिधि बातचीत कर सकते हैं ताकि संवाद के लिए किसी पक्ष को दूसरे देश में जाने की जरूरत न पड़े।
उन्होंने कहा कि बातचीत के जरिए यह तय किया जा सकता है कि किन मुद्दों का समाधान संभव है और किन पर फिलहाल सहमति नहीं बन सकती। जिन मुद्दों पर सहमति न बने उन्हें भविष्य के लिए छोड़ा जा सकता है और परिस्थितियां अनुकूल होने पर उन पर दोबारा चर्चा की जा सकती है।
अय्यर ने कहा कि अतीत के विवादों को लेकर लगातार बहस करना विदेश नीति नहीं है। उनके मुताबिक किसी भी रचनात्मक समाधान तक पहुंचने का रास्ता बातचीत से ही निकलता है। उन्होंने कहा कि भारत की परंपरा संवाद की रही है और दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध तथा बातचीत जारी रहनी चाहिए।
जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर भी रखी राय
देश की राजनीतिक स्थिति पर सवाल के जवाब में अय्यर ने कहा कि विपक्षी दलों को एकजुट होकर काम करना चाहिए। इंडिया गठबंधन का जिक्र करते हुए कहा कि अगर विपक्ष पूरी तरह एकजुट होता तो 2024 के लोकसभा चुनाव में उसे और सीटें मिल सकती थीं।
उन्होंने दावा किया कि ऐसी स्थिति में केंद्र में राजनीतिक समीकरण अलग होते और जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा वापस मिल सकता था। उन्होंने अनुच्छेद 370 और 35ए को लेकर भी अपनी राय रखी और कहा कि इनमें संभवतः किसी अलग स्वरूप में बदलाव हो सकता था। अय्यर ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के भीतर भी विभिन्न क्षेत्रों और वर्गों के बीच संवाद जरूरी है। उन्होंने कहा कि श्रीनगर को जम्मू से और जमीनी स्तर की आवाज को सरकारों के बीच होने वाली बातचीत में शामिल किया जाना चाहिए।