विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल गुलमर्ग में दो दिवसीय राष्ट्रीय जनजातीय महोत्सव संपन्न हो गया। इस मौके पर जनजातीय मामलों के सचिव जम्मू-कश्मीर डॉ. शाहिद इकबाल चौधरी ने कहा कि देश के सांस्कृतिक ताने-बाने के अभिन्न अंग के रूप में आदिवासी संस्कृतियों को संरक्षित कर उन्हे बढ़ावा देने के महत्व पर जोर दिया है। कहा कि आदिवासी परिदृश्य हमारे देश में मौजूद समृद्धि और विविधता की याद दिलाता है।
जनजातीय मामलों के मंत्रालय के सहयोग से राष्ट्रीय जनजातीय महोत्सव में देश भर से 10 से अधिक राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों की भागीदारी रही। जिससे स्वदेशी समुदायों के लिए अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को साझा करने के लिए एक मंच तैयार हुआ।
इसका उद्देश्य आदिवासी रीति-रिवाजों और जीवन के तरीकों के प्रति समझ, प्रशंसा और सम्मान को बढ़ावा देना रहा है। पूरे उत्सव के दौरान आगंतुक आदिवासी कलात्मकता में डूबे रहे। पारंपरिक नृत्य प्रदर्शन, मंत्रमुग्ध कर देने वाला संगीत और मनमोहक प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों को झूमने पर विवश कर दिया।
अरुणाचल प्रदेश, उड़ीसा, मध्य प्रदेश, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ आदि सहित विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के कारीगरों और शिल्पकारों ने अपनी हस्तकला का प्रदर्शन किया। जिसकी लोगों ने जमकर सराहना की। केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव डॉ. नवल जीत कपूर महोत्सव में लोगों को जनजातीय प्रतिनिधियों के साथ सीधे जुड़ने का मौका मिला।