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Srinagar News: जम्मू-कश्मीर सरकार ने लावारिस कुत्तों को उनके स्थान से हटाने पर लगाई रोक

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- खिलाने और कल्याण के लिए नए दिशानिर्देश जारी
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते स्थानीय नागरिकों, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों (आरडब्ल्यूए) और अन्य समूहों द्वारा लावारिस कुत्तों को उनके स्थान से हटाने या विस्थापित करने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। सरकार ने साथ ही आवारा पशुओं के कल्याण और उन्हें खाना खिलाने के संबंध में नए दिशानिर्देश भी जारी किए हैं। आवास और शहरी विकास विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत आवारा पशुओं के कल्याण, संरक्षण और प्रबंधन को लागू करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि नागरिकों या पशु कल्याण समूहों द्वारा सामुदायिक कुत्तों को खाना खिलाने पर कोई प्रतिबंध नहीं है लेकिन ऐसा केवल सरकार की ओर से निर्धारित स्थानों पर ही किया जाना चाहिए।
जम्मू-कश्मीर के शहरी क्षेत्रों में प्रत्येक वार्ड में कुत्तों की आबादी के आधार पर अतिरिक्त फीडिंग स्पॉट चिन्हित किए जा रहे हैं। विभाग ने स्थानीय निवासियों से अपील की है कि वे इन स्थानों को तय करने में अपने नगर निगम, परिषद या समिति का सहयोग करें। ये स्थान बच्चों के पार्क या बाजारों से दूर, खुले और साफ-सुथरे इलाकों में बनाए जा रहे हैं ताकि भूखे जानवर बच्चों या राहगीरों पर हमला न करें।
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एक आधिकारिक आदेश के अनुसार किसी भी व्यक्ति, समूह या आरडब्ल्यूए द्वारा आवारा कुत्तों को हटाना या विस्थापित करना कानूनन अपराध है और ऐसा करने पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। नगर पालिकाओं में पुनर्वास के लिए क्षेत्रों की पहचान की जा रही है और तब तक सभी संगठनों और नागरिकों को निर्धारित स्थानों पर ही खाना खिलाने तथा पास के पशु चिकित्सा केंद्रों में उनके नसबंदी और टीकाकरण में मदद करने को कहा गया है। विभाग का मानना है कि नागरिक समूहों के छोटे से सहयोग से भी इस समस्या का मानवीय और सहानुभूतिपूर्ण समाधान निकाला जा सकता है।
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इसके साथ ही सरकार ने चेतावनी दी है कि आवारा पशुओं को परेशान करना, उन पर हमला करना या उनके साथ क्रूरता करना पूरी तरह से अवैध है जिसके लिए उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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