अभियान पूरा करने के बाद अपने अनुभव साझा करते हुए गौरी ने कहा कि उन्हें नदी से कभी डर नहीं लगा। हालांकि उनकी सुरक्षा को लेकर दूसरे लोग काफी चिंतित थे। उसने कहा कि उसे डर नहीं लगा। सिर्फ यह सोच रही थी कि अगर राफ्ट पलट गई तो वह खुद को कैसे संभालेगी। हमारी टीम बहुत अच्छी थी और पूरा अभियान बेहद सुचारु रूप से पूरा हुआ।
गौरी ने बताया कि उन्होंने अपने पिता से पूछा था कि क्या वह तेज बहाव वाले रैपिड्स को पार कर सकती है। उनके पिता ने तुरंत उनका हौसला बढ़ाते हुए इसकी अनुमति दी। उन्होंने कहा कि कैंपिंग का अनुभव भी बेहद यादगार रहा। उन्होंने खुद टेंट लगाए और रात में लद्दाख के साफ आसमान का आनंद लिया। उन्होंने बताया कि गर्मी की छुट्टियों में उनका लद्दाख आकर राफ्टिंग करने का कोई इरादा नहीं था। उनके पिता ने कहा कि मोबाइल पर समय बिताने के बजाय मेरे साथ राफ्टिंग पर चलो तो उन्होंने जवाब दिया, अगर मुझे बर्फ देखने को मिलेगी तो मैं जरूर चलूंगी। गौरी ने कहा कि यदि भविष्य में मौका मिला तो वह फिर से राफ्टिंग करना चाहेंगी।
अभियान के लीडर शिवम गुरूंग (जो ऋषिकेश के रहने वाले हैं) ने गौरी के आत्मविश्वास और साहस की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा, पहली बार जब मैंने गौरी को देखा तो उसकी कम उम्र के कारण मुझे थोड़ी झिझक हुई लेकिन जैसे ही वह नदी में उतरी, उसका आत्मविश्वास देखकर मैं हैरान रह गया। उसने समूह के साथ सभी रैपिड्स सफलतापूर्वक पार किए और पूरे अभियान के दौरान उसके चेहरे पर मुस्कान बनी रही।
शिवम ने गौरी के पिता की भी प्रशंसा करते हुए कहा कि बच्चों को एडवेंचर स्पोर्ट्स के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए क्योंकि इससे उनमें आत्मविश्वास, मानसिक मजबूती और जीवन के महत्वपूर्ण कौशल विकसित होते हैं। अभियान में सुरक्षा कायकिंग टीम का हिस्सा रहे लद्दाख निवासी त्सेरिंग सांगरुप ने बताया कि जंस्कार नदी के रैपिड्स ग्रेड-3 प्लस से ग्रेड-4 श्रेणी के हैं जो अनुभवी राफ्टर्स के लिए भी चुनौतीपूर्ण माने जाते हैं।