शोपियां में बारिश से प्रभावित सेब के बाग।
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दक्षिण कश्मीर के शोपियां के कई इलाकों में वीरवार रात को हुई भारी ओलावृष्टि से फलों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। बागवान कटाई के मौसम से पहले भारी आर्थिक नुकसान को लेकर चिंतित हैं। वहीं प्रभावित किसानों ने सरकार से तत्काल मुआवजे की मांग की है। स्थानीय निवासियों के अनुसार ओलावृष्टि से लार्गम, बोनजार, मेमेंडर, गाग्रेन और कई आस-पास के गांवों सहित कई इलाके प्रभावित हुए। यहां बागों को काफी नुकसान पहुंचा है। किसानों ने बताया कि ओलावृष्टि ने फलों की नई फसलों को विकास के एक महत्वपूर्ण चरण में ही तबाह कर दिया जिससे इस मौसम में भविष्य की पैदावार को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि रात के समय काफी देर तक ओले गिरते रहे जिससे प्रभावित गांवों में सेब के बागों और फल देने वाले अन्य पेड़ों को नुकसान पहुंचा। इस घटना ने एक बार फिर इस क्षेत्र के बागवानी क्षेत्र की संवेदनशीलता को उजागर किया है जो स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बना हुआ है। स्थानीय निवासी शाकिर अहमद ने बागवानों को हुए नुकसान पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि फलों की फसल अभी मटर के दाने जितनी ही बड़ी हुई थी कि तभी ओलावृष्टि से बागों में भारी तबाही मच गई। हमारे बागों को बुरी तरह नुकसान पहुंचा है। हमने पिछले दशकों में भी ओलावृष्टि देखी है लेकिन इस बार तबाही का पैमाना कहीं अधिक गंभीर है।
शाकिर अहमद ने आगे कहा कि बागवानों ने सरकार से बार-बार अपील की है कि किसानों के लिए प्रभावी सुरक्षा उपाय लागू किए जाएं जिनमें फसल बीमा योजनाएं और ओलावृष्टि-रोधी जालों पर सब्सिडी शामिल है। उनके अनुसार बागवानों को बार-बार आने वाली प्राकृतिक आपदाओं से बचाने के लिए ऐसे उपाय आवश्यक हैं जो साल-दर-साल उनकी आजीविका को नुकसान पहुंचाती रहती हैं। उन्होंने आगे कहा कि किसान समुदाय की बार-बार की गई गुजारिश के बावजूद उनकी मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है जिससे बागवानों को भारी नुकसान खुद ही उठाना पड़ रहा है। प्रभावित किसानों ने प्रशासन से आग्रह किया है कि वे ओलावृष्टि से हुए नुकसान का तत्काल आकलन करें और प्रभावित परिवारों को पर्याप्त मुआवजा प्रदान करें।
उन्होंने सरकार से बागवानी क्षेत्र की सुरक्षा के लिए दीर्घकालिक नीतियां बनाने का भी आह्वान किया जो दक्षिण कश्मीर में हजारों परिवारों को सहारा देता है। इस बीच, स्थानीय लोगों को आशंका है कि यदि समय पर सहायता प्रदान नहीं की गई, तो मौसम से संबंधित बार-बार होने वाला यह नुकसान जिले के बागवानों की आर्थिक स्थिति पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।