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गांव के पास पहुंची जंगल की आग, रात पर जगे ग्रामीण

Sun, 07 May 2017 09:17 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला श्रीनगर।
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अलकनंदा घाटी में चौरास पट्टी में केंद्रीय गढ़वाल विवि के आवासीय परिसर के समीप लगी आग - फोटो : amar ujala
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विकास खंड कीर्तिनगर के सिल्काखाल क्षेत्र के जंगलों में धधकती आग शनिवार को तेजी से गांव तक आ पहुंची। भय से ग्रामीण रात भर जगे रहे। विभागीय कर्मी आग पर काबू पाने की कोशिश में जुटे है लेकिन आग की लपटें एक जंगल से दूसरे जंगलों तक तेजी से फैल रही है। एक सप्ताह में अब तक क्षेत्र के 5 हेक्टेयर जंगल आग की भेंट चढ़ चुके है। 
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सिल्काखाल क्षेत्र के महेंद्र व जयधार के जंगल शनिवार को आग से धधक उठे। देर रात जंगल की आग गांव के पास तक पहुंच गई। इससे चिंतित ग्रामीण रात भर नहीं सो पाए। ग्रामीण राजेंद्र सिंह रौथाण ने बताया कि ग्रामीण रात भर गांव की व खेतों में रखी चारापत्ति आदि की सुरक्षा करते रहे। गनीमत रही कि इस दौरान किसी जान माल का नुकसान नहीं हुआ। वहीं चोनीखाल के समीप के जंगल भी विगत कई दिनों से धधक रहे है। विभाग की माने तो दिन को जंगलों की आग बुझा ली जाती है, लेकिन रात को हवा से फिर आग सुलग जा रही है। 

चट्टानी हिस्सों की आग बुझाना मुश्किल 
आग की लपटें एक जंगल से दूसरे जंगल में तेजी से फैल रही है। ऐसे में  विभाग कर्मियों के एक जंगल की आग पर काबू पाते ही दूसरे जंगल धधक लग रहे है। वहीं जंगल के कुछ चट्टानी हिस्से ऐसे जहां कर्मी नहीं पहुंच पा रहे है। संसाधन न होने से इन चट्टानी हिस्सों की आग पर काबू पाना विभाग के लिए चुनौती बना हुआ है। 
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चीड़ की छेती जंगलों पर बरपा रहे कहर 
सिल्काखाल क्षेत्र के जयधार, महेंद्र गांव, विवि के चौरास परिसर के समीप, चुन्नी खाल व सेंद्री के जंगलों तथा देवप्रयाग के दशरथाचंल, धरीपोखरी के जंगलों के धधकने से गर्म हवा चल रही है, जिससे आस पास के क्षेत्रों का पारा चढ़ गया है। संसाधनों के अभाव की मार झेल रहा वन विभाग मात्र झापा के सहारे ही आग बुझाने के प्रयास में लगा है। जंगलों की आग को फैलाने में सबसे बड़ा कारण चीड़ के छेती का है। पहाड़ी के ऊपरी भागों में फैले चीड़ के जंगलों में लगी आग से जमीन में गिरे चीड़ के  छेती भी सुलग कर पहाड़ी के निचले ढालों की ओर गिर रही है। इस कारण आग कई जगहों पर तेजी से फैल रही है। 

सिल्काखाल क्षेत्र में आग बुझाने में 15 कर्मी लगे है।  बार-बार जंगलों में आग लगने का मुख्य कारण चीड़ के छेती है।  जंगल में जब तक एक जगह आग बुझाई जा रही है। तब तक चीड़ के छेती दूसरी ओर आग सुलगा रहे है। आग बुझाते समय जंगल में जल रही लकड़ियों के ऊपर मिट्टी डाली जा रही है ताकि आग न फैले लेकिन चीड़ के जंगल और छेती समस्या पैदा कर रहे है।  
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प्रबोध पांडे, विभाग के रेंज अधिकारी 
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