टिहरी जिले की देवप्रयाग विधान सभा सीट पर राज्य गठन के बाद पहली बार कमल खिला है। सीट पर कांग्रेस, यूकेडी व निर्दलीय प्रत्याशियों ने ही शुरू से जीत दर्ज की थी। ऐसे में इस बार भाजपा प्रत्याशी विनोद कंडारी को पहले ही चुनाव में जीत मिलना एतिहासिक रहा है।
देवप्रयाग विधान सभा सीट से उत्तराखंड के गांधी कहे जाने वाले स्व. इंद्रमणि बडोनी और कामरेड नेता विद्यासागर नौटियाल विधायक रह चुके हैं। राज्य गठन से पूर्व इस सीट पर कांग्रेस , वामपंथ, भाजपा, जनता दल और उक्रांद सहित निर्दलीय विधायक बनते आए हैं। वहीं राज्य गठन के बाद यूकेडी, कांग्रेस व निर्दलीय प्रत्याशी देवप्रयाग सीट से जीत दर्ज करा चुके हैं, लेकिन भाजपा यहां अपना खाता नहीं खोल पा रही थी।
इस बार भाजपा प्रत्याशी विनोद कंडारी ने जीत दर्ज कर देवप्रयाग में पहली बार कमल खिलाया है। विनोद कंडारी की जीत का प्रमुख कारण मोदी लहर व युवा चेहरा बताया जा रहा है। चुनाव में इस सीट पर तीन कद्दावर नेताओं मंत्री प्रसाद नैथानी, शूरवीर सजवाण और दिवाकर भट्ट का भविष्य दांव पर लगा हुआ था।
नहीं टूटा मिथक
श्रीनगर। मंत्री प्रसाद नैथानी शिक्षा मंत्री के चुनाव हारने के मिथक को नहीं तोड़ पाए। उत्तराखंड राज्य के इतिहास में शिक्षा मंत्री कभी दुबारा चुनाव नहीं जीत पाया है। मंत्री प्रसाद नैथानी की हार ने इस मिथक को बनाए रखा है।
सरकार में रहते हैं देवप्रयाग विधायक
श्रीनगर। उत्तराखंड बनने के बाद देवप्रयाग के विधायक राज्य सरकार में मंत्री बनते आए हैं। चाहे निर्दलीय हो या किसी दल के। वर्ष 2002 में मंत्री प्रसाद नैथानी (कांग्रेस), वर्ष 2007 में दिवाकर भट्ट (उक्रांद) और वर्ष 2012 में मंत्री प्रसाद नैथानी (निर्दलीय) कैबिनेट मंत्री बने। इस बार यह उम्मीद लगाई जा रही है।