पुलवामा में सीआईके का अभियान।
- फोटो : CIK
सिम कार्ड और मोबाइल फोन से लेकर टैबलेट और कई तरह के डिजिटल उपकरणों तक, अपराध सिद्ध करने वाले सबूतों का एक जखीरा फोरेंसिक जांच के लिए जब्त किया गया है। बरामद सामग्री से महत्वपूर्ण सुराग मिलने की उम्मीद है, जिससे आगे की जांच और अतिरिक्त प्रवर्तन कार्रवाई का रास्ता साफ होगा।'
सीआईके ने पुष्टि की है कि घाटी भर में यह कार्रवाई ऑनलाइन आतंकवाद और गैरकानूनी डिजिटल गतिविधियों के खिलाफ लड़ाई की शुरुआत है। अधिक छापे और गिरफ्तारियां जल्द ही होंगी क्योंकि अधिकारी कश्मीर के युवाओं को पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी आकाओं, हिंसक उग्रवाद के प्रभाव से बचाने और घाटी में शांति बनाए रखने के लिए दृढ़ हैं।
पुलवामा में सीआईके का अभियान।
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आतंकियाें की मदद करने वाले दो एसपीओ बर्खास्त
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने आतंकवाद समर्थकों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए कठुआ जिले में तैनात दो एसपीओ को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। दोनों पर आतंकियों से संपर्क रखने और उनकी गतिविधियों में सहयोग करने के गंभीर आरोप हैं।
बर्खास्त किए गए एसपीओ में अब्दुल लतीफ और मोहम्मद अब्बास हैं। जांच में सामने आया कि अब्दुल लतीफ आतंकियों के संपर्क में था और उन्हें सहायता प्रदान करता था। इस मामले में उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी और उसे डोडा जेल में सजा भी काटनी पड़ी थी। दूसरे एसपीओ मोहम्मद अब्बास के खिलाफ इसी तरह के मामलों में चार अलग-अलग एफआईआर दर्ज हैं।
पुलवामा में सीआईके का अभियान।
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एसएसपी कठुआ मोहिता शर्मा ने कार्रवाई की पुष्टि की है। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर पुलिस में आतंक समर्थकों या राष्ट्रविरोधी तत्वों के लिए कोई स्थान नहीं है। यह कदम सुरक्षा एजेंसियों की जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा है, जिसके तहत आतंकवादी नेटवर्क से जुड़े किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा रही है।
इससे पहले ओवर ग्राउंड वर्करों पर पिछले डेढ़ साल में बड़ी संख्या में कार्रवाई की गई है। दर्जनों ओवरग्राउंड वर्करों, आतंकी मददगारों पर पुलिस ने पीएसए भी लगाया है। पुलिस ने दो टूक संदेश दिया है कि देशविरोधी गतिविधियों में संलिप्त कोई भी बक्शा नहीं जाएगा।