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पीओके में अब भी लांचिंग पैड सक्रिय, आतंकी प्रशिक्षण जारी

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श्रीनगर। सीजफायर से बॉर्डर पर सुरक्षा स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन खुफिया इनपुट है कि पीओके में आतंकियों के लॉंचिंग पैड सक्रिय हैं। आतंकी प्रशिक्षण जारी है। इस वजह से एलओसी पर सतर्क रहने की जरूरत है। यह बात मंगलवार को श्रीनगर के बादामीबाग स्थित चिनार कोर मुख्यालय में हुई कोर ग्रुप में उभरकर सामने आई। बैठक की अध्यक्षता चिनार कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल डीपी पांडेय तथा डीजीपी दिलबाग सिंह ने की। कोर ग्रुप में नागरिक प्रशासन, खुफिया एजेंसियों, सुरक्षा बलों के आला अधिकारी तथा मंडलायुक्त कश्मीर शामिल हैं।
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बैठक में कहा गया कि नशे तथा हथियारों की क्रॉस बॉर्डर तस्करी पर खुफिया एजेंसियों तथा सुरक्षा बलों की पैनी नजर है। इसकी वजह से एलओसी से कश्मीर घाटी जाने वाले सभी रास्तों पर सतर्कता बरती जा रही है। घाटी में पिछले छह महीने में हिंसा की समीक्षा करते हुए कहा गया कि सुरक्षा मानकों पर इसमें सुधार देखने को मिल रहा है। आतंकवाद को जिंदा रखने में भूमिका निभा रहे ओजीडब्ल्यू नेटवर्क के खिलाफ व्यापक पैमाने पर अभियान चलाया गया है। पुलिस ने अब तक 400 ओजीडब्ल्यू को गिरफ्तार किया है। स्थानीय युवाओं की भर्ती में पिछले साल की तुलना में कमी आई है। भटके युवाओं को मुख्यधारा में लाने तथा भर्ती प्रक्रिया में शामिल ओजीडब्ल्यू नेटवर्क को टारगेट करने का सिलसिला जारी रहेगा। कुछ इलाकों में भर्ती अधिक हो रही है जहां आतंकवाद रोधी अभियान तेज हो रहे हैं।
संदिग्ध वाहनों पर पैनी नजर
बैठक में बताया गया कि संदिग्ध वाहनों पर पूरी नजर रखी जा रही है। क्योंकि इनका इस्तेमाल ट्रांसपोर्टेशन के साथ ही हथियारों व नशे की खेप को ढोने में किया जाता है। इनका इस्तेमाल आईईडी आधारित वाहन के रूप में भी किया जाता है। कुछ आतंकी तंजीमों की आईईडी इस्तेमाल को भी प्रभावी ढंग से नकारा किया गया है। नेशनल हाईवे पर अतिक्रमण पर खासी नजर रखी जा रही है क्योंकि यह सुरक्षा बलों के काफिले के गुजरने के लिए खतरा हो सकता है। बैठक में आतंकी हमले की आड़ में आपराधिक कृत्यों पर नजर रखने पर भी जोर दिया गया। कहा गया कि आतंकी हमले व आपराधिक हमले में फर्क करने की जरूरत है। आतंकियों के सॉफ्ट टारगेट को निशाना बनाने की बदली रणनीति पर भी विचार विमर्श किया गया।
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पाकिस्तान के दुष्प्रचार तंत्र को नाकाम करने की बनी रणनीति
बैठक में पाकिस्तान के दुष्प्रचार तंत्र को भी नाकाम बनाने की रणनीति बनाई गई। दुष्प्रचार के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर भी प्रभावी तरीके से अंकुश लगाने पर बल दिया गया। ऑपरेशन के दौरान आपसी समन्वय से होने वाले जनहानि में कमी पर सुरक्षा बलों तथा प्रशासन की प्रशंसा की गई। साथ ही घाटी में हिंसा के दुष्चक्र को तोड़कर शांति स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
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