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J&K: ड्रग-फ्री कैंपस की दिशा में बड़ा कदम, क्लस्टर यूनिवर्सिटी में नशा मुक्त भारत ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित

Mon, 20 Apr 2026 02:44 PM IST
Nikita Gupta अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर

सार

क्लस्टर यूनिवर्सिटी श्रीनगर ने जम्मू-कश्मीर पुलिस के सहयोग से नशा मुक्त भारत अभियान पर ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें विशेषज्ञों और शिक्षकों ने भाग लिया। कार्यक्रम में नशे के दुष्प्रभावों पर चर्चा करते हुए ड्रग-फ्री कैंपस और जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया।
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श्रीनगर यूनिवर्सिटी में जागरूकता कार्यक्रम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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क्लस्टर यूनिवर्सिटी ऑफ श्रीनगर ने जम्मू और कश्मीर पुलिस के सहयोग से अपने मुख्य परिसर में नशा मुक्त भारत अभियान पर एक ओरिएंटेशन प्रोग्राम आयोजित किया। इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय फैकल्टी सदस्य, एनएमबीए कोऑर्डिनेटर, विश्वविद्यालय का स्टाफ व संबद्ध कॉलेजों के एनएसएस प्रोग्राम अधिकारी, युवा विकास और पुनर्वास केंद्र श्रीनगर के विशेषज्ञ और काउंसलर उपस्थित थे। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता उपकुलपति प्रोफेसर डॉ. मोहम्मद मोबिन ने मुख्य अतिथि के रूप में की। रजिस्ट्रार सैयद विलायत हुसैन रिजवी, परीक्षा नियंत्रक प्रोफेसर डॉ. खुर्शीद अहमद मीर और अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।

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सभा को संबोधित करते हुए प्रोफेसर मोबिन ने कहा कि नशीली दवाओं का दुरुपयोग युवाओं और समाज के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि विश्वविद्यालयों को ड्रग मुक्त कैम्पस सुनिश्चित करने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए और सभी हितधारकों से प्रतिबद्धता और जवाबदेही के साथ काम करने का आग्रह किया।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि जम्मू और कश्मीर के उपराज्यपाल व्यक्तिगत रूप से इस अभियान की निगरानी कर रहे हैं जो इसके महत्व को दर्शाता है। रजिस्ट्रार रिजवी ने सामूहिक संस्थागत जिम्मेदारी की आवश्यकता को उजागर किया और कहा कि जागरूकता अभियानों को धरातलीय स्तर पर ठोस कार्रवाई में बदलने की जरूरत है।
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प्रो. खुर्शीद अहमद मीर ने नशीली दवाओं के दुरुपयोग को रोकने के लिए अनुशासन, जागरूकता, छात्र सहभागिता और अनुसंधान-आधारित डेटा संग्रह को आवश्यक उपायों के रूप में प्रमुखता दी। विश्वविद्यालय ने कहा कि इसने अपने घटक और संबद्ध कॉलेजों के साथ मिलकर पिछले वर्ष इस अभियान के तहत सराहनीय गतिविधियां की हैं जबकि ऐसे प्रयासों को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

डॉ. मोहम्मद मुजफ्फर खान और काउंसलरों द्वारा विशेषज्ञ सत्र आयोजित किया गया। जिसमें उन्होंने पदार्थों के दुरुपयोग को संबोधित करने के लिए व्यावहारिक रणनीतियां और इंटरैक्टिव प्रदर्शन साझा किए। डॉ. खान ने इस लत के मूल कारणों इसके मानसिक और सामाजिक प्रभाव के बारे में बताया और प्रारंभिक हस्तक्षेप और सामुदायिक समर्थन के महत्व को उजागर किया। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ जिसने विश्वविद्यालय की कैंपसों को ड्रग-फ्री बनाने और नशा मुक्त भारत की दृष्टि में योगदान करने की प्रतिबद्धता को पुन पुष्टि की। कार्यक्रम की कार्रवाई डॉ. उलजमा शफी द्वारा संचालित की गई।

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