अधिकारियों के अनुसार चकवाली नाले के पास बादल फटने के बाद पानी का स्तर अचानक बढ़ गया। तेज बहाव अपने साथ मिट्टी, पत्थर और मलबा लेकर आया, जिससे आसपास के गांव प्रभावित हुए। बाढ़ के कारण स्थानीय सड़कों को नुकसान पहुंचा और घाटी में आवाजाही अस्थायी रूप से बाधित हो गई।
स्थानीय निवासियों ने बताया कि बाढ़ का पानी कृषि भूमि और निचले इलाकों में घुस गया जिससे किसानों और ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई। हालांकि राहत की बात यह रही कि घटना में किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान की तत्काल कोई सूचना नहीं मिली है।
प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आकलन करने और राहत कार्यों की निगरानी के लिए टीमों को मौके पर भेज दिया है। अधिकारियों ने लोगों से नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों के आसपास सतर्क रहने की अपील की है, क्योंकि ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम अभी भी अस्थिर बना हुआ है।
प्रशासन का कहना है कि मौसम में सुधार होते ही क्षतिग्रस्त पुल और अन्य बुनियादी ढांचे की मरम्मत का कार्य शुरू किया जाएगा।
बांदीपोरा जिले की गुरेज और तुलैल घाटियां हिमालयी क्षेत्र में स्थित हैं और गर्मियों के दौरान बादल फटने तथा अचानक आने वाली बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशील मानी जाती हैं।