बरामद उपकरणों के फोरेंसिक विश्लेषण से नेटवर्क का लगाया जा रहा पता
सीआईके की टीमों ने कई डिजिटल उपकरण और आपत्तिजनक सामग्री जब्त की है। इसमें पांच मोबाइल फोन, पांच सिम कार्ड, एक टैबलेट, दस्तावेज और साहित्य शामिल हैं। एसएसपी ने बताया कि बरामद सभी उपकरणों का विस्तृत फोरेंसिक विश्लेषण किया जा रहा है।
इससे दुष्प्रचार के संगठित प्रयासों से जुड़े एक व्यापक डिजिटल नेटवर्क का पता चलने की उम्मीद है। इनकी गतिविधियों का उद्देश्य चरमपंथी सामग्री को बढ़ावा देना और जनता की धारणा को प्रभावित करना था। उन्होंने कहा कि फिलहाल धरपकड़ और जांच जारी है।
दुख्तरान-ए-मिल्लत हिजबुल का मुखौटा संगठन रहा है
दुख्तरान-ए-मिल्लत (राष्ट्र की बेटियां) एक महिला संगठन था जो कश्मीर में इस्लामी कानून स्थापित करने और प्रदेश को देश से अलग करने के लिए जिहाद की वकालत करता था। यह आतंकवादी समूह हिजबुल मुजाहिदीन का एक मुखौटा संगठन रहा है।
इस समूह की स्थापना 1987 में हुई थी और इसकी प्रमुख आसिया अंद्राबी थी। 1990 के दशक की शुरुआत में कश्मीर में उग्रवाद के दौरान इस समूह ने नकाब और बुर्का न पहनने वाली महिलाओं को धमकियां दीं। इनमें से कुछ एसिड हमलों का शिकार हुईं।
भारत सरकार ने इसे एक आतंकवादी संगठन घोषित किया और 2018 में इस पर प्रतिबंध लगा दिया। यह समूह मुख्य रूप से सशस्त्र गतिविधियों के बजाय इंटरनेट प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपनी गतिविधियां चलाता था। 2018 में एनआईए ने इसकी नेता आसिया अंद्राबी और उसकी सेक्रेटरी को आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने के आरोप में गिरफ्तार किया था। उनकी गिरफ्तारी के बाद से समूह निष्क्रिय हो गया और इसे निष्क्रिय माना जाता है।