चंबा एनिमल सेंटर में लावारिस कुत्तों के साथ फुंसोग वांग्याल।
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सेना और अर्धसैनिक बलों के सहयोग को भी महत्वपूर्ण बताया गया है, क्योंकि कई लावारिस कुत्ते सैन्य क्षेत्रों में पाए जाते हैं। इसके अलावा, वांग्याल ने वन्यजीव-संवेदनशील इलाकों से आक्रामक कुत्तों को शेल्टर में स्थानांतरित करने के लिए वन्यजीव विभाग से फंड आवंटित करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि एक अन्य गंभीर समस्या कुत्तों का अवैध विस्थापन है जिसमें लोग उन्हें अनजान क्षेत्रों में छोड़ देते हैं। इससे स्थानीय कुत्तों के हमले होते हैं और कई मामलों में उनकी मौत भी हो जाती है। वांग्याल ने पशु क्रूरता कानूनों के सख्त पालन और भारी जुर्माने की मांग की। बीमारियों का प्रकोप भी एक बड़ी चुनौती है। हाल ही में जंस्कार में कैनाइन डिस्टेंपर के मामलों में कई कुत्तों की मौत हुई जिसका मुख्य कारण पर्याप्त सुविधाओं का अभाव था। वांग्याल के अनुसार, टीकाकरण ही इसका सबसे प्रभावी बचाव है। चंबा एनिमल वेलफेयर सेंटर ने अपने सभी कुत्तों का टीकाकरण सुनिश्चित किया है और संक्रमित पशुओं के रेस्क्यू व इलाज का कार्य जारी रखा है।
भविष्य की योजना के तहत संगठन ने लद्दाख के हर गांव या ब्लॉक में पशु शेल्टर स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है जिन्हें स्थानीय जनप्रतिनिधियों के नेतृत्व में संचालित किया जाए ताकि समस्या का दीर्घकालिक समाधान हो सके। वांग्याल ने कहा, लद्दाख के लोग अपनी करुणा के लिए दुनिया भर में जाने जाते हैं। यदि हम सभी सहानुभूति के साथ मिलकर काम करें तो इंसान और पशु दोनों शांतिपूर्ण सहअस्तित्व में रह सकते हैं।
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