उमर ने पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के खिलाफ केंद्र की अचानक कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। कहा कि पहले वांगचुक प्रधानमंत्री की तारीफ करते थे और लद्दाख को यूटी दिए जाने की खुशी जाहिर करते थे, लेकिन अब अचानक उन पर पाकिस्तान से संबंधों का आरोप लगाया जा रहा है।
24 सितंबर को लद्दाख में स्टेटहुड और छठा अनुसूची शामिल करने की मांग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन में हिंसा भड़क उठी थी, जिसमें चार लोग मारे गए और कई घायल हुए। इसके बाद वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत हिरासत में लिया गया।
उमर ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों ने हाल के चुनावों में भारी भागीदारी दिखाकर अपनी प्रतिबद्धता जताई है, लेकिन केंद्र की अधूरी वादाखिलाफी से जनता का भरोसा टूट रहा है। सुप्रीम कोर्ट के उन बयानों की भी आलोचना की, जिसमें स्टेटहुड की मांग पर स्थानीय परिस्थितियों जैसे पहलगाम आतंकी हमले को ध्यान में रखने को कहा गया था।
उन्होंने पूछा, क्या पाकिस्तान अब तय करेगा कि जम्मू-कश्मीर को स्टेटहुड मिले या नहीं? उमर ने जोर देकर कहा कि स्टेटहुड किसी ‘अच्छे व्यवहार के लिए इनाम’ नहीं होना चाहिए।
यह मुद्दा जमीन का नहीं, बल्कि कश्मीरी लोगों का है। लोग फिर से अपने अधिकारों और सम्मान की भावना महसूस करना चाहते हैं।
केंद्र के इस रवैये से जनता का भरोसा कम हो रहा है, जबकि जनता ने बार-बार अपनी आवाज उठाई है और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में भाग लेकर अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है।