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Iran Unrest: ईरान में फंसे 2000 कश्मीरी छात्र, परिवार चिंतित, JKSA ने पीएम से उनकी वापसी के लिए लगाई गुहार

Thu, 15 Jan 2026 12:58 PM IST
आकाश दुबे संवाद न्यूज एजेंसी, श्रीनगर

सार

पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने एक्स अकाउंट पर लिखा, कश्मीर समेत देशभर के हजारों छात्र मौजूदा अस्थिर हालात के बीच ईरान में फंसे हुए हैं। इससे गहरा भय और चिंता का माहौल है और छात्रों के परिजन बच्चों की सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित हैं।
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ईरान में सत्ताविरोधी प्रदर्शन लगातार तेज होते जा रहे हैं। (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
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जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (जेकेएसए) ने ईरान में फंसे करीब 2000 कश्मीरी छात्रों और अन्य भारतीय नागरिकों की बढ़ती सुरक्षा चिंताओं को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री डॉ. एस.जयशंकर से तत्काल हस्तक्षेप कर भारतीय छात्रों सहित सभी नागरिकों की निकासी की व्यवस्था करने की मांग की है।

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एसोसिएशन ने कहा है कि तेहरान में भारतीय दूतावास ने छात्रों को जल्द से जल्द स्व-व्यवस्थित तरीके से ईरान छोड़ने की सलाह दी है लेकिन अभी तक कोई औपचारिक या समन्वित निकासी योजना घोषित नहीं की गई है। जेकेएसए के राष्ट्रीय संयोजक नासिर खुएहामी ने एक बयान में कहा कि ईरान में तेजी से बिगड़ती सुरक्षा स्थिति ने कश्मीर में व्यापक भय, अनिश्चितता और चिंता पैदा कर दी है। अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर अत्यधिक परेशान हैं।

एसोसिएशन ने कहा कि अस्थिर और अशांत वातावरण में छात्रों से स्वयं निकासी की व्यवस्था करने की उम्मीद करना न तो सुरक्षित है और न ही व्यावहारिक। संगठित निकासी तंत्र की अनुपस्थिति ने छात्रों और उनके परिवारों की परेशानी को और बढ़ा दिया है। जेकेएसए ने विदेश मंत्रालय की क्षमताओं पर पूर्ण विश्वास जताते हुए भारत सरकार के विदेशों में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के निरंतर प्रयासों की सराहना की। हालांकि, वर्तमान स्थिति की गंभीरता को देखते हुए त्वरित, सक्रिय और समन्वित राजनयिक हस्तक्षेप की आवश्यकता पर बल दिया गया ताकि छात्र खुद संकट का सामना न करें।

एसोसिएशन ने भारत सरकार से स्पष्ट निकासी ढांचा, समर्पित आपातकालीन हेल्पलाइन और सुरक्षित पारगमन मार्ग स्थापित करने की अपील की है जिससे भारतीय छात्र सुरक्षित, सम्मानजनक और सुरक्षित तरीके से घर लौट सकें। बता दें कि ईरान में जारी व्यापक विरोध प्रदर्शनों और अशांति के बीच भारतीय दूतावास ने 14 जनवरी 2026 को ताजा सलाह जारी की है जिसमें सभी भारतीय नागरिकों (छात्रों, तीर्थयात्रियों, व्यवसायियों और पर्यटकों) को उपलब्ध परिवहन साधनों से जल्द से जल्द देश छोड़ने की सलाह दी गई है। ईरान में लगभग 2,000 कश्मीरी छात्र मुख्य रूप से मेडिकल कोर्स कर रहे हैं।

महबूबा मुफ्ती बोलीं- ईरान से छात्रों की सुरक्षित वापसी के लिए हस्तक्षेप करे सरकार
पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने गुरुवार को ईरान में जारी तनाव के मद्देनजर कश्मीरी छात्रों समेत अन्य छात्रों की सुरक्षित वापसी के लिए केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की। यह मांग ईरान में पढ़ रहे कई कश्मीरी छात्रों के अभिभावकों द्वारा वहां की स्थिति पर चिंता व्यक्त करने और केंद्र से अपने बच्चों की वापसी में सहायता करने की अपील करने के एक दिन बाद की गई है। 

छात्रों के परिवारों में चिंता
अभिभावकों ने कहा कि यह सलाह छात्रों में घबराहट पैदा कर रही है और परिवारों को गहरी चिंता में डाल रही है। खासकर इंटरनेट और संचार सुविधाओं की कमी के कारण। उन्होंने बताया कि अधिकांश छात्रों को इंटरनेट व्यवधानों का सामना करना पड़ रहा है जिससे परिवारों के साथ नियमित संपर्क बनाए रखना मुश्किल हो गया है।

एक अभिभावक सैयद मुजामिल कादरी ने कहा, हम विदेश मंत्री की क्षमता और ईमानदारी पर पूरा भरोसा रखते हैं लेकिन हम भारत सरकार से विनम्र अनुरोध करते हैं कि वह हमारे बच्चों को इस मुश्किल हालात में अकेला न छोड़े और उनकी सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करे। अभिभावकों ने बताया कि इंटरनेट कनेक्टिविटी की कमी ने उनकी चिंता को और बढ़ा दिया है। वे अपने बच्चों से नियमित रूप से बात नहीं कर पा रहे हैं। छात्र निराश और अपनी सुरक्षा तथा भविष्य को लेकर अनिश्चित हैं।

केंद्र सरकार से अपील करते हुए अभिभावकों ने तत्काल निकासी की व्यवस्था करने की मांग की। उन्होंने ईरानी अधिकारियों से बातचीत कर भारतीय छात्रों की सुरक्षित और व्यवस्थित वापसी सुनिश्चित करने का भी अनुरोध किया। अभिभावकों ने कहा, कम से कम भारत सरकार को ईरान सरकार से संपर्क करना चाहिए ताकि हमारे बच्चे सुरक्षित घर लौट सकें।
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उन्होंने कहा कि कई छात्र ईरान में मेडिकल और अन्य व्यावसायिक कोर्स कर रहे हैं और ऐसे आपातकाल में भारतीय सरकार पर निर्भर हैं। अभिभावकों ने अधिकारियों से त्वरित कार्रवाई की अपील की, कहा कि देरी से छात्रों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर और खतरा मंडरा सकता है।

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