जम्मू-कश्मीर विधानसभा में भाजपा विधायकों ने राज्य को विशेष दर्जे के प्रस्ताव के विरोध में शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन हंगामा किया। विधानसभा अध्यक्ष ने भाजपा के 12 विधायकों और लंगेट विधायक शेख खुर्शीद को बाहर निकालने का आदेश दिया। बाहर निकलने के बाद भाजपा ने समानांतर विधानसभा का संचालन किया और लोगों के मुद्दों की सुनवाई की।
शुक्रवार को जैसे ही सुबह 10 बजे सदन की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्ष के नेता सुनील शर्मा खड़े हुए और प्रस्ताव को लेकर बोलने लगे। इस पर सत्ता पक्ष के नेताओं ने विरोध जताया । इसी बीच भाजपा के अन्य विधायक अपनी जगह पर खड़े हो गए और विधायकों ने ''पाकिस्तानी एजेंडा नहीं चलेगा'', "पीसी हाय हाय", "अलगाववादी हाय हाय" के नारे लगाने शुरू कर दिए।
विधानसभा में तनाव उस समय नाटकीय रूप से बढ़ गया जब पीडीपी विधायक फैयाज मीर ने अन्य नेताओं - सज्जाद लोन, शेख खुर्शीद और वहीद पर्रा के साथ मिलकर एक बैनर फहराया जिस पर लिखा था, “हम अनुच्छेद 370 की बिना शर्त बहाली चाहते हैं।” इसके बाद भाजपा विधायकसदन के वेल में कूद पड़े और विपक्षी नेताओं से भिड़ गए।
विधानसभा में अराजक स्थिति पैदा हो गई। स्पीकर अब्दुल रहीम राथर ने मार्शलों को आदेश दिया कि इन लोगों को बाहर निकाला जाए। मार्शलों ने भाजपा के 12 विधायकों को बाहर निकाल दिया। इसके अलावा शेख खुर्शीद भी बाहर निकाल दिए गए। शाम लाल शर्मा को मार्शलों ने गोद में उठाकर बाहर निकाला।
सदन में होती रही नारेबाजी
इसके बावजूद भी स्थित शांत नहीं हुई। बाकी के भाजपा नेताओं द्वारा सदन में नारेबाजी जारी रखी। उनके द्वारा "भारत माता की जय", "जहां हुए बलिदान मुखर्जी वो कश्मीर हमारा है", "पाकिस्तानी एजेंडा नहीं चलेगा", "अलगाववादी एजेंडा नहीं चलेगा", "संविधान की रक्षा कौन करेगा हम करेंगे", "मार्शल लॉ नहीं चलेगा" जैसे नारे लगाए। इसपर स्पीकर ने उन्हें कहा, "उचित व्यवहार करें, यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।" बता दें कि इसके तुरंत बाद 11 अन्य भाजपा विधायक विरोध में सदन से बाहर चले गए। इसके बाद सदन का काम सामान्य रूप से चलता रहा है। उप राज्यपाल के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर सदन में मौजूद नेता बोलते रहे।
शाम सात बजे तक चली सदन की कार्रवाई
विधानसभा के पांच दिवसीय सत्र का शुक्रवार को अंतिम दिन था। पहली बार मध्याह्न एक बजे सदन स्थगित किया गया। इसके बाद कार्रवाई 2.30 बजे दोबारा शुरू की गई। राज्यपाल के अभिभाषण पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के संबोधन के बाद सदन को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया।