- सूखा मौसम पानी के संसाधनों, खेती और स्थानीय आजीविका पर पड़ सकता है भारी
भट शहजाद
बांदीपोरा। सर्दियों में बर्फबारी में असामान्य देरी से उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा जिले के निवासियों में चिंता बढ़ गई है। उन्हें डर है कि अगर सूखा मौसम बना रहा तो पानी के संसाधनों, खेती और स्थानीय आजीविका पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बर्फबारी जिसे हिमालयी क्षेत्र में पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए जरूरी माना जाता है। इसकी कमी का असर पहले से ही जंगलों, जल निकायों और खेतों में महसूस किया जा रहा है। कई लोगों का मानना है कि पर्यावरण के खराब होने और प्रदूषण ने प्रकृति का संतुलन बिगाड़ दिया है जिससे मौसम का पैटर्न अप्रत्याशित हो गया है।
बांदीपोरा के एक स्थानीय निवासी बशारत हुसैन ने बदलते मौसम को इंसानी हरकतों से जोड़ा और इसके व्यापक सामाजिक-आर्थिक प्रभाव की चेतावनी दी। हुसैन ने कहा, हमारे जंगल खराब हो गए हैं और हमारे जल निकाय प्रदूषित हो गए हैं जिसका सीधा असर प्रकृति पर पड़ा है। यहां तक कि सर्दियों के चरम दिनों में भी लोग बर्फबारी के लिए तरस रहे हैं।
अगर बर्फबारी नहीं होती है तो यह न केवल हमारी जमीन और पानी के संसाधनों को प्रभावित करेगा बल्कि लोगों के आर्थिक विकास को भी प्रभावित करेगा। हमारी आजीविका खासकर जो खेती और पर्यटन पर निर्भर हैं, बुरी तरह प्रभावित हो सकती है।
कश्मीर में नदियों और झरनों को रिचार्ज करने में बर्फबारी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है जो गर्मियों के महीनों में पीने के पानी की आपूर्ति और सिंचाई में मदद करती है। विशेषज्ञों ने बार-बार चेतावनी दी है कि सर्दियों में बारिश में कमी से घाटी में पानी की कमी बढ़ सकती है। हुसैन ने उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में बर्फबारी होगी और कश्मीर में पारिस्थितिक संतुलन बहाल होगा। संवाद