एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इसका उद्देश्य मस्जिदों और मदरसों या उनसे जुड़े लोगों का डेटाबेस तैयार करना है। उन्होंने कहा कि पिछले साल नवंबर में पकड़े गए ‘व्हाइट कॉलर’ आतंकवादी मॉड्यूल की जांच में यह पता चला कि कुछ संदिग्ध मदरसों या सोशल मीडिया के जरिए उग्रवादी बन रहे थे। इसमें कुछ इमामों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई है।
पुलिस ने बताया कि इस मॉड्यूल में जम्मू-कश्मीर, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के लोग शामिल थे। इस मामले में नौ लोग गिरफ्तार किए गए, जिनमें तीन डॉक्टर भी शामिल थे और 2,900 किलोग्राम विस्फोटक बरामद किया गया। इसमें अमोनियम नाइट्रेट, पोटेशियम नाइट्रेट और सल्फर शामिल थे।
अधिकारियों के अनुसार इस मॉड्यूल में उग्रवादी पेशेवर और छात्र शामिल थे, जो पाकिस्तान और अन्य देशों में बैठे संदिग्धों से जुड़े थे। उन्होंने कहा कि इस नेटवर्क का खुलासा अक्तूबर 2025 में श्रीनगर में जेईएम (जैश-ए-मोहम्मद) के पोस्टर मिलने के बाद हुआ।
पुलिस ने चेतावनी दी है कि मस्जिदों और मदरसों में जुड़े लोगों की वित्तीय और व्यक्तिगत जानकारी जुटाकर भविष्य में सुरक्षा उपायों को और मजबूत किया जाएगा।