हरियाली अमावस्या पर निभाई गई सदियों पुरानी परंपरा
दशनामी अखाड़े की ओर से जारी बयान के अनुसार अमरनाथ यात्रा के तहत महंत दीपेंद्र गिरि के नेतृत्व में छड़ी मुबारक को श्रीनगर के गोपादरी हिल्स स्थित शंकराचार्य मंदिर ले जाया गया। यहां हरियाली अमावस्या के मौके पर विधि-विधान से पूजा की गई।
महंत दीपेंद्र गिरि ने बताया कि यह परंपरा लंबे समय से अमरनाथ यात्रा का हिस्सा रही है। उन्होंने कहा कि इतिहासकारों के अनुसार मंदिर का निर्माण मूल रूप से राजा संदीमन ने कराया था। पहले इसे ज्येष्ठेश्वर या ज्योतेश्वर मंदिर के नाम से जाना जाता था, लेकिन आदि गुरु शंकराचार्य के यहां आने के बाद यह शंकराचार्य मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
13 अगस्त को हरि पर्वत स्थित शारिका भवानी मंदिर जाएगी छड़ी मुबारक
महंत दीपेंद्र गिरि के मुताबिक छड़ी मुबारक को गुरुवार 13 अगस्त को श्रीनगर के हरि पर्वत किले में स्थित शारिका भवानी मंदिर ले जाया जाएगा। वहां देवी के दर्शन और पूजा-अर्चना की जाएगी।
यात्रा स्थगित, लेकिन छड़ी मुबारक की धार्मिक यात्रा जारी
अमरनाथ यात्रा को ट्रैक की मरम्मत के कारण 9 अगस्त को निर्धारित समय से करीब तीन सप्ताह पहले रोक दिया गया था। हालांकि, यात्रा से जुड़ी धार्मिक परंपराएं जारी रहेंगी। छड़ी मुबारक की अमरनाथ गुफा तक जाने वाली पारंपरिक यात्रा पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगी। अमरनाथ यात्रा का समापन 28 अगस्त को मूल कार्यक्रम के मुताबिक होगा।