पहलगाम में बुधवार सुबह छड़ी मुबारक चंदनबाड़ी से शेषनाग की ओर रवाना हुई। रात्रि विश्राम शेषनाग में होगा और इसके बाद पंचतरणी की ओर प्रस्थान किया जाएगा। आखिर में पवित्र गुफा में दर्शन किए जाएंगे। इसके साथ ही इस साल अमरनाथ यात्रा पर विराम लग जाएगा। दशनामी अखाड़े के महंत दीपेंद्र गिरि सहित देशभर से आए संत इस जत्थे में शामिल हैं।
श्री अमरनाथ यात्रा आखिरी पड़ाव की ओर बढ़ रही है। छड़ी मुबारक के दर्शन के साथ ही यात्रा संपन्न होगी। अमरनाथ यात्रा के लिए आए यात्रियों ने पुंछ स्थित श्री बूढ़ा अमरनाथ के दर्शन किए हैं। वहीं, कई यात्री स्थानीय धार्मिक स्थलों का भी भ्रमण कर रहे हैं।
दशनामी अखाड़ा से बूढ़ा अमरनाथ पहुंची छड़ी मुबारक, तीन दिवसीय मेला शुरू
पुंछ स्थित प्राचीन दशनामी अखाड़ा मंदिर से मंगलवार को भगवान शंकर और मां पार्वती का स्वरूप पवित्र चांदी की छड़ी मुबारक को बूढ़ा अमरनाथ मंदिर के लिए रवाना किया गया। पवित्र छड़ी देर शाम को बूढ़ा अमरनाथ मंदिर पहुंची, जहां मंत्रोच्चार और पूजन कर छड़ी को शिवलिंग पर स्थापित कर दिया गया। इसके साथ ही सावन मास का तीन दिवसीय वार्षिक मेला भी शुरू हो गया। बड़ी संख्या में भक्तों ने मंदिर में दर्शन कर प्रभु का आशीर्वाद लिया।
वहीं, सुबह छह बजे श्री दशनामी अखाड़ा मंदिर में महंत 1008 स्वामी विश्वात्मानंद सरस्वती ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ छड़ी पूजन करवाया। प्रशासन, पुलिस, सेना के अधिकारियों, साधू-संतों, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र रैना, प्रदेश सचिव विबोध गुप्ता सहित सैकड़ों लोग पूजा में शामिल हुए। इसके बाद पवित्र छड़ी को जेके पुलिस के जवानों ने सलामी देकर रवाना किया। पुंछ से मंडी तक 22 किलोमीटर मार्ग पर भक्तों के लिए जगह-जगह खाने-पीने के स्टॉल व लंगर लगाए गए थे। पुंछ के लोगों का कहना है कि छड़ी यात्रा हिंदू, मुस्लिम, सिख एकता व भाईचारे का प्रतीक है।