बातचीत में जीएम शाहीन ने कहा कि अगर बीजेपी को सरकार बनाने के लिए समर्थन जुटाना होता तो वह आसानी से ऐसा कर सकती थी। उन्होंने कहा कि विधायकों को पैसे देने के आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है और यह केवल चुनावी वादों को पूरा न कर पाने के मुद्दे से जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास है।
शाहीन ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने चुनाव के दौरान मुफ्त बिजली और एलपीजी सिलेंडर जैसे कई वादे किए थे, लेकिन अब उन मुद्दों पर जवाब देने के बजाय आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति की जा रही है।
वहीं, बीजेपी नेता अल्ताफ ठाकुर ने भी उमर अब्दुल्ला के बयान को गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए उनसे आरोपों के समर्थन में सबूत पेश करने या माफी मांगने की मांग की। उन्होंने कहा कि बिना प्रमाण के इस तरह के गंभीर आरोप लगाना उचित नहीं है।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शनिवार को दावा किया था कि बीजेपी ने जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के एक विधायक को पार्टी बदलने के लिए 20 से 30 करोड़ रुपये, मंत्री पद और राज्य का दर्जा बहाल करने का प्रस्ताव दिया था। उन्होंने कहा था कि विधायक ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया और इसकी जानकारी उन्हें दी।
उमर अब्दुल्ला के इस बयान का जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने समर्थन किया था। उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया था कि पार्टी की राजनीति झूठ पर आधारित है और उमर अब्दुल्ला तथ्यों की जांच के बाद ही कोई बयान देते हैं।