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सिनेमा से खेल तक: फिल्म फेस्टिवल के बाद अब मैराथन का रोमांच, कश्मीर में पर्यटन को मिल रही नई पहचान

Fri, 11 Sep 2026 01:15 PM IST
Nikita Gupta अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर

सार

पहले जम्मू-कश्मीर अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के सफल आयोजन ने कश्मीर को सिर्फ शूटिंग लोकेशन नहीं, बल्कि वैश्विक सिनेमा और रचनात्मकता के केंद्र के रूप में स्थापित करने की नई उम्मीद जगाई।
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फिल्म निर्माता इम्तियाज अली अवाॅर्ड देते हुए। - फोटो : एजेंसी
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विस्तार
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ग्रीष्मकालीन राजधानी में आयोजित पहला जम्मू-कश्मीर अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव सूफी संगीत के रूहानी सुरों के बीच संपन्न हो गया। अपने पीछे ये सिर्फ मनोरंजन की यादें नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर के लिए एक नई सिने-क्रांति का बीज छोड़ गया है। आयोजन का सबसे बड़ा संदेश यह है कि कश्मीर अब केवल फिल्मों के लिए एक खूबसूरत बैकग्राउंड या शूटिंग लोकेशन मात्र नहीं रहना चाहता, बल्कि आधुनिक वैश्विक स्टोरीटेलिंग और रचनात्मकता का एक जीवंत केंद्र बनने की दिशा में कदम बढ़ा चुका है।

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महोत्सव चार दिन चला। इस दाैरान फिल्मों से जुड़े विभिन्न सत्र हुए। फिल्म निदेशकों, निर्माताओं और कलाकारों ने अपने अनुभव से जम्मू-कश्मीर की यादों को सींचा। लोक गायक गुलजार अहमद गनई की सूफी प्रस्तुति ने महोत्सव के अंतिम दिन समां बांध दिया। डल झील में आयोजित फ्लोटिंग सिनेमा जैसे प्रयोगों ने देश-दुनिया के 360 से अधिक प्रतिनिधियों का ध्यान खींचा। इससे दिखाया गया कि कश्मीर की भौगोलिक सुंदरता को सिनेमाई अनुभव के साथ कैसे पिरोया जा सकता है।

यह आयोजन केवल बाहरी निर्माताओं के लिए नहीं था, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य कश्मीर के युवाओं को फिल्म निर्माण, निर्देशन और कहानी कहने की कला को एक करियर के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित करना रहा।  

लद्दाख में 122 किमी की सिल्क रूट अल्ट्रा रेस शुरू
साहस, हिम्मत और ताकत की चरम परीक्षा। 122 किलोमीटर की लंबी दूरी और 5,370 मीटर ऊंचे खारदुंग ला दर्रे की ऑक्सीजन सोख लेने वाली चढ़ाई... यह सिर्फ एक दौड़ नहीं, बल्कि खेल के अद्भुत रोमांच और मानवीय जज्बे का सबसे बड़ा इम्तिहान है। यानी लद्दाख मैराथन के 13वें संस्करण के तहत नुब्रा घाटी से ऐतिहासिक सिल्क रूट अल्ट्रा रेस का आगाज हो चुका है। 120 से अधिक जांबाज धावक अपनी शारीरिक सीमाओं को चुनौती देते हुए इस दुर्गम रास्ते पर फतह हासिल करने निकल पड़े हैं, जहां हवा भले ही कम हो, लेकिन हौसले आसमान छू रहे हैं।

प्रतिष्ठित पांचवीं सिल्क रूट अल्ट्रा रेस को वीरवार की शाम नुब्रा घाटी के क्यागर गांव से नुब्रा जिले के उपायुक्त मुकुल बेनीवाल ने झंडी दिखाकर रवाना किया। यह हाई-एल्टीट्यूड रेस 3,140 मीटर की ऊंचाई से शुरू होकर सुमूर, लाकजुंग, तिरिथ, खालसर और खारदुंग जैसे दुर्गम इलाकों से गुजरेगी। इसके बाद धावक 5,370 मीटर ऊंचे खारदुंग ला दर्रे को पार कर लेह की ओर उतरेंगे।

खारदुंग ला चैलेंज रेस आज
72 किलोमीटर लंबी खारदुंग ला चैलेंज रेस भी शुक्रवार तड़के करीब 3 बजे खारदुंग गांव से शुरू होगी। इन दोनों चुनौतीपूर्ण रेस का रोमांचक समापन 11 सितंबर को लेह के मुख्य बाजार में होगा। इसके लिए शाम 5 बजे का कट-ऑफ समय तय किया गया है। 
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खेल नहीं, ऐतिहासिक विरासत
यह भव्य आयोजन केवल खेल का ही नहीं, बल्कि प्राचीन सिल्क रूट की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का भी प्रतीक है। क्यागर के ग्रामीणों ने सांस्कृतिक संध्या आयोजित कर धावकों का पारंपरिक अंदाज में स्वागत कर उनका हौसला बढ़ाया। आयोजकों ने इस दुर्गम मार्ग पर धावकों की सुरक्षा के लिए विशेष सहायता केंद्र और पर्यावरण संरक्षण के पुख्ता इंतजाम किए हैं।
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