शिकारे किनारे, डल झील पर सन्नाटा
टीम जब डल झील पहुंची तो यहां सभी शिकारे किनारे पर खड़े मिले। पर्यटक नहीं थे शिकारे वाले भी अलसाए से दिखाई दिए। इन्हीं में से एक गनी अहमद ने बताया कि पहलगाम में हमले के बाद पर्यटक एकदम कम हो गए थे। तीन-चार दिन बाद थोड़े पर्यटक आने शुरू हुए तो पाकिस्तान की गोलाबारी ने उन्हें डरा दिया।
फिर भी उन्हें उम्मीद है कि सीजफायर के बाद जब उड़ानें शुरू होंगी तो पर्यटक आएंगे।यहां के बाजार भी सूने दिखाई दिए। करीब आधी दुकानें ही खुली थीं। दुकानदार मोहम्मद रऊफ ने बताया कि आतंकियाें ने पर्यटकों पर हमला कर हमारे पेट पर लात मारी, फिर पाकिस्तान ने नागरिकों पर कायराना हमला कर नुकसान पहुंचाया। हर तरफ से नुकसान सबसे ज्यादा कश्मीरियों का ही है।
पाकिस्तान नहीं चाहता कि कश्मीरी मुख्यधारा से जुड़ें
लाल चौक पर चहलपहल नजर आई। अधिकतर स्थानीय लोग ही थे। यहां के एक बुजुर्ग दुकानदार ने बताया कि पाकिस्तान नहीं चाहता कि कश्मीरी मुख्यधारा से जुड़ें, इसीलिए उसने पर्यटकों पर हमला करा सीधे पर्यटन कारोबार पर चोट की है। कश्मीर के 80 फीसदी लोग पर्यटन से ही जुड़े हैं। घाटी में पर्यटन बढ़ा तो लोग मुख्यधारा से जुड़ते चले गए। पाकिस्तान ने इसी रीढ़ पर हमला किया। धर्म के नाम पर नफरत फैलाई जिसका शिकार अन्य राज्यों में कश्मीरी छात्र व अन्य लोग हुए।
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