महबूबा मुफ्ती ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते हुए कहा कि पीडीपी कार्यकर्ता सरकार की कथित बैकडोर नियुक्तियों और सरकारी नौकरियों के आउटसोर्सिंग के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें घरों में ही रोक दिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) सरकार जब जवाबदेही के सवाल उठते हैं तो पुलिस पर नियंत्रण न होने का बहाना बनाती है लेकिन जब युवा या विपक्षी दल शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाते हैं तो पुलिस के साथ मिलकर उन्हें दबाने का काम किया जाता है।
महबूबा मुफ्ती ने यह भी कहा कि सरकार की दोहरे रवैये की पोल खुल गई है, क्योंकि एक तरफ पीडीपी कार्यकर्ताओं को प्रदर्शन से रोका जा रहा है, वहीं दूसरी ओर गरीब परिवारों के खिलाफ अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में पुलिस की मदद ली जाती है। उधर, पीडीपी ने आरोप लगाया है कि सरकार कई विभागों में निजी एजेंसियों के माध्यम से बैकडोर नियुक्तियां कर रही है।
इस बीच लिस ने श्रीनगर के प्रेस एन्क्लेव में पीडीपी के प्रस्तावित विरोध मार्च को रोक दिया और प्रदर्शन के लिए पहुंचे कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने से रोक दिया। हालांकि प्रशासन या सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।