श्रीनगर। सरकार ने मंगलवार को विधान परिषद को सूचित किया कि 1947 के बंटवारे और उसके बाद हुए कबायली हमले के कारण पाक अधिकृत कश्मीर से 31,619 परिवार तथा पश्चिम पाकिस्तान से 5,764 परिवार सीमा के इस ओर चले आए थे। इनमें से 5,300 परिवार देश के अन्य भागों में बस गए, बाकी 26,319 परिवार वेस्ट पाकिस्तान के शरणार्थियों के साथ जम्मू-कश्मीर में ही रहने लगे।
मंत्री रमण भल्ला ने सदस्य रविंद्र शर्मा के ध्यानाकर्षण नोटिस के जवाब में यह जानकारी दी है। शर्मा ने इस नोटिस में सरकार से 1947, 1965 तथा 1971 के शरणार्थियों की परेशानियों के बारे में सरकार की पहल की जानकारी मांगी थी। इस पर मंत्री ने बताया कि 1965 तथा 1971 के भारत-पाक युद्धों के समय 10,065 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। इनमें से 8,100 परिवारों को जम्मू, सांबा तथा कठुआ जिलों में 156 बस्तियों में बसाया गया। कई परिवारों ने अपने स्तर में शहरी इलाकों में रहना शुरू कर दिया। उन्होंने बताया कि 1947 के पाक अधिकृत कश्मीर के 26,319 परिवारों में से 21,116 को ग्रामीण इलाकों में 10 लाख कनाल भूमि मुहैया कराकर बसाया गया। इनमें से वे परिवार जो अपने स्तर पर शहरों में बस गए, में से 2421 परिवारों को प्लाट तथा रिहायशी घर मुहैया करवाए गए। 2814 परिवार ऐसे थे, जिनको किसी कारण वर्ष भूमि नहीं मिल सकी। सरकार ने इसकी भरपाई के लिए उन्हें प्रति कनाल 30000 रुपये मुआवजे के तौर पर दिए। इस योजना के तहत 2440 परिवारों को अभी तक 30.64 करोड़ दिए जा चुके हैं। मंत्री ने वेस्ट पाकिस्तान के शरणार्थियों का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य के नागरिक नहीं होने के कारण अब तक इनको कोई विशेष सहायता प्रदान नहीं की गई है। इन परिवारों के पास 46,000 कनाल भूमि तो है लेकिन इनपर मालिकाना हक नहीं है। 1965 तथा 1971 के छंब शरणार्थियों के बारे में मंत्री ने बताया कि इनमें से 8,100 परिवारों को बस्तियों में बसाया गया। जमीन की कमी वाले 699 परिवारों को कम जमीन के स्थान पर 5000 रुपये प्रति कनाल के हिसाब से धन दिया गया है।