श्रीनगर। जो कभी ख्वाबों में नहीं सोचा था, उसको हकीकत में बदल देने के लिए में सीमा सुरक्षा बल को सलाम करता हूं। ये शब्द भारत भ्रमण से लौटे विद्यार्थियों के दल के एक सदस्य राजा रशीद ने वीरवार को सीमा सुरक्षा बल द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कहे। सीमा सुरक्षा बल द्वारा कश्मीर के दूरदराज इलाकों पर आधारित 38 विद्यार्थियों, जिनमें 18 लड़कियां शामिल थी, भारत दर्शन के लिए रवाना हुआ दल कल ही कश्मीर लौटा था।
हुमहामा में स्थित सीमा सुरक्षा बल कश्मीर फ्रंटियर के अधिकारियों तथा पत्रकारों के साथ अपने अनुभव को साझा करते समय बच्चे काफी प्रसन्न दिखे। कुपवाड़ा जिले के दूरदराज तंगदार इलाके के निवासी राजा रशीद ने राज्य के बाहर अपने पहले भ्रमण की कुछ यादों को ताजा करते हुए कहा, सच कहूं तो मैंने हवाई जहाज में सफर करने की कभी कल्पना भी नहीं की थी, लेकिन अब यह हकीकत बन चुका है। मैं यकीन दिलाता हूं कि इस सफर को उम्र भर याद रखूंगा।
बारामूला जिले के सिंहपोरा गांव की सनप्रीत कौर ने भी ऐसे ही विचार प्रकट किए। उसने बताया कि वह इस टूर को हमेशा याद रखना चाहेंगी। वह कभी जहाज की यात्रा नहीं कर सकती थी, लेकिन सीमा सुरक्षा बल ने यह मौका देकर उसको देश के अन्य राज्यों की संस्कृति के बारे में जानने का अवसर प्रदान किया है।
दसवीं की छात्रा असमत जहांगीर, जसप्रीत तथा कई दूसरे विद्यार्थियों ने भी ऐसे ही विचार प्रकट किए। इनमें से अधिकांश बच्चे दूरदराज क्षेत्रों के गरीब परिवारों से थे और यह पहली बार जहाज पर सवार हुए थे।
29 अक्तूबर को बच्चों का यह दल जहाज पर सवार होकर भारत दर्शन टूर पर रवाना किया गया था। 12 दिनों के दौरे के दौरान उन्होंने बंगलूर, मैसूर, दिल्ली, आगरा, ग्वालियर तथा जयपुर शहरों को देखा और कई प्रतिष्ठित व्यक्तियों से मुलाकात भी की। इस मौके पत्रकारों से बातचीत करते हुए डीआईजी आईएस राणा ने बताया कि सीमा सुरक्षा बल केवल सीमा की प्रहरी नहीं है, वह सद्भावना के तहत जनहित कार्य भी करती है और बच्चों के दल को भारत-भ्रमण पर रवाना करना उसकी की एक कड़ी थी। उन्होंने जानकारी दी कि दूरदराज क्षेत्र के निवासियों को भारत भ्रमण के लिए भेजने का सिलसिला 1999 में शुरू किया गया था और अब तक 22 ग्रुप भारत भ्रमण कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि जब ये बच्चे रवाना हुए तो काफी शर्मीले थे, लेकिन लौटने पर इनमें काफी बदलाव आया है।