26वें विजय दिवस पर नागरिक सुरक्षा संस्था के नारायणन ने बताया कि 1999 से वे 'विजय कलश यात्रा' निकाल रहे हैं। उनका कहना है कि आज के बच्चों को कारगिल युद्ध के बारे में बहुत कम जानकारी है, इसलिए यह यात्रा उन्हें युद्ध के इतिहास और शहीदों की गाथा से जोड़ने का एक प्रयास है।
इस वर्ष की यात्रा में देश की 26 नदियों का जल और पूर्व प्रधानमंत्रियों व सैन्य अधिकारियों द्वारा चढ़ाई गई मालाओं के फूलों को एकत्र कर 26 विजय कलश में रखा गया है। यह यात्रा 19 मई को शुरू हुई थी और पूरे भारतवर्ष में घूमते हुए अब कारगिल के ड्रास पहुंची है।
आज 25वें विजय कलश की जगह 26वें विजय कलश को स्मारक पर स्थापित किया जाएगा। इसके साथ ही वे शहीदों की विधवाओं की मदद का भी प्रयास करते हैं।
26वें कारगिल विजय दिवस पर 1999 के युद्ध में शामिल रहे वायुसेना के पूर्व अधिकारी त्रिलोक ने कहा कि उस समय भारी संख्या में सैनिक हताहत और घायल हुए थे।
उन्होंने बताया कि आज के मुकाबले तब हमारी रक्षा प्रणाली काफी सीमित थी, लेकिन अब उसमें बहुत प्रगति हो चुकी है। साथ ही उन्होंने बताया कि हर वर्ष कारगिल विजय कलश को श्रद्धा के साथ प्रस्तुत किया जाता है, जो वीरों की स्मृति का प्रतीक है।
26वें कारगिल विजय दिवस के अवसर पर 1999 के युद्ध में शहीद हुए वीर जवानों के परिवारों ने युद्ध स्मारक पर पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
इन परिवारों ने शहीदों की वीरता और बलिदान को याद करते हुए कहा कि यह दिन केवल यादों का नहीं, गर्व और सम्मान का दिन है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।
कारगिल विजय दिवस पर रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने कहा कि आज पूरा देश उन वीर जवानों को याद कर रहा है जिन्होंने पाकिस्तान को करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि चाहे सर्जिकल स्ट्राइक हो, एयर स्ट्राइक या ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सेना किसी से कम नहीं है।
उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने स्वदेशी हथियारों से पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर हमला किया, जिससे दुनिया हैरान रह गई। मंत्री ने यह भी कहा कि भारत आज 92 देशों को रक्षा उपकरण निर्यात कर रहा है, और 2029 तक इसे ₹3 लाख करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आत्मनिर्भर भारत की सोच और रक्षा मंत्री के नेतृत्व को इस प्रगति का आधार बताया और कहा कि हम अब 75% तक आत्मनिर्भर हो चुके हैं।
कारगिल विजय दिवस 2025 के अवसर पर केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया और रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने पदयात्रा में हिस्सा लेकर 1999 के कारगिल युद्ध में शहीद हुए सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस कार्यक्रम में स्थानीय लोग और छात्र भी बड़ी संख्या में शामिल हुए, जिन्होंने शहीदों के साहस और बलिदान को याद करते हुए उनके सम्मान में श्रद्धा व्यक्त की।
भारत की संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं
26वें कारगिल विजय दिवस के समारोह में सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि जो भी भारत की संप्रभुता, एकता और नागरिकों को नुकसान पहुंचाने की साजिश करेगा, उसे भविष्य में भी कड़ा जवाब मिलेगा, यही भारत का नया सामान्य है।
उन्होंने बताया कि भारत एक विकसित आधुनिक और भविष्यवादी शक्ति बनने की दिशा में बढ़ रहा है। हाल ही में एक नई ब्रिगेड का गठन स्वीकृत किया गया है, जिसमें मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री, आर्मर्ड यूनिट्स, आर्टिलरी, स्पेशल फोर्सेस और लॉजिस्टिक सपोर्ट शामिल होंगे। विशेष बल हमेशा सीमा पर दुश्मन को आश्चर्यचकित करने के लिए तैयार रहेंगे।
सेना की ताकत कई गुना बढ़ेगी और वे विकास कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, खासकर लद्दाख जैसे सीमा क्षेत्रों में। उन्होंने 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने के लिए पूरी तैयारी का भरोसा भी दिलाया।