अधिकारियों के अनुसार, त्सो मोरीरी झील के पास संरक्षित पारिस्थितिक क्षेत्र में अवैध रूप से प्रवेश करने पर 12 बाइक सवारों पर 10-10 हजार का जुर्माना लगाया गया। वहीं, पैंगोंग झील के पास वन्यजीव संरक्षण नियमों का उल्लंघन करने वाले एक एसयूवी चालक पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
प्रशासन का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में लद्दाख मोटरसाइकिल यात्रियों के लिए बेहद लोकप्रिय पर्यटन स्थल बनकर उभरा है। लेकिन इसके साथ ही संरक्षित वन्यजीव क्षेत्रों, झीलों के किनारों, आर्द्रभूमियों और पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील इलाकों में अवैध ऑफ-रोडिंग की घटनाएं भी बढ़ी हैं, जिससे नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र और वन्यजीवों को नुकसान पहुंच रहा है।
लद्दाख के उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना ने पर्यटकों से अपील करते हुए कहा कि लद्दाख की झीलें, पहाड़, नदियां और वन्यजीव यहां की अमूल्य धरोहर हैं। उन्होंने कहा कि सभी पर्यटक लद्दाख की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लें, लेकिन ऐसे किसी भी कार्य से बचें जिससे पर्यावरण या संरक्षित वन्यजीव क्षेत्रों को नुकसान पहुंचे। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन प्राकृतिक विरासत को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।
प्रशासन ने हाल ही में लद्दाख एनवायरमेंट प्रोटेक्शन फोर्स (ईपीएफ) की तैनाती भी की है। पूर्व सैनिकों से बनी इस विशेष टीम को पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ मौके पर ही चालान जारी करने का अधिकार दिया गया है।
अधिकारियों के मुताबिक दोनों मामलों का पता वन्यजीव विभाग की नियमित गश्त और स्थानीय वन्यजीव सूचना तंत्र के जरिए चला। प्रशासन का कहना है कि भविष्य में भी ऐसे अभियान लगातार जारी रहेंगे, ताकि लद्दाख की प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता को सुरक्षित रखा जा सके।