आरोप है कि यह नेटवर्क घुसपैठ करने वाले आतंकवादियों को रसद और अन्य प्रकार की सहायता प्रदान कर रहा था।जांच एजेंसी ने ये छापे श्रीनगर, कुपवाड़ा, अनंतनाग, पुलवामा और बडगाम जिलों में मारे हैं। एजेंसी के अनुसार, इस तलाशी का उद्देश्य साजिश से संबंधित अतिरिक्त दस्तावेजी, डिजिटल और भौतिक साक्ष्य जुटाना था।
एनआईए ने एक बयान में कहा, अब तक की जांच में पाकिस्तान स्थित आकाओं और स्थानीय सहयोगियों के बीच कथित संबंधों का संकेत मिला है। आरोप है कि इन सहयोगियों का इस्तेमाल संचार, रसद व्यवस्था, आतंकवादियों की आवाजाही और उन्हें छिपाने, पनाह देने, रेकी करने और अन्य प्रकार की सुविधाएं प्रदान करने के लिए किया जा रहा था।
यह मामला मूल रूप से श्रीनगर के जकूरा पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। बाद में इस साल एनआईए ने इसे गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम 1967, शस्त्र अधिनियम, 1959 और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 के तहत फिर से दर्ज किया था। कुपवाड़ा जिले के हंदवाड़ा में खानपोरा बाबागुंड और वोधपोरा में तड़के से ही कार्रवाई शुरू कर दी गई। यहां दस्तावेजों और साक्ष्यों की जांच की।अनंतनाग जिले में एनआईए तीन ठिकानों पर दबिश दी गई।
सबसे पहले डूरू के क्रीरी शाहबाद में एक मकान खंगाला गया। यहां से एक मोबाइल फोन जब्त किया गया। इसके बाद टीम ने बिजबिहाड़ा स्थित सीकॉप परिसर में सर्च ऑपरेशन चलाया गया। इसके बाद एनआईए की टीम सदूरा गांव में पहुंची। यहां पब्लिक सेफ्टी एक्ट (पीएसए) के तहत जेल में बंद एक व्यक्ति के आवास में कई घंटे तलाशी ली गई।
वित्तीय लेनदेन और हथियारों के स्रोत की जांच जारीजांच एजेंसी इस मामले में वित्तीय लेनदेन, संचार माध्यमों, आरोपियों की आवाजाही और हथियारों व विस्फोटकों के स्रोत की भी जांच कर रही है, ताकि पूरे नेटवर्क और इसकी गतिविधियों के विस्तार को पूरी तरह स्थापित किया जा सके।
ऐसे सामने आया था मामला
इस मामले की शुरुआत 31 मार्च की देर रात एक नाका चेकिंग के दौरान हुई थी। वहां से प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से कथित रूप से जुड़े एक ओजीडब्ल्यू को गिरफ्तार किया गया था। उसके कब्जे से एक हैंड ग्रेनेड और जिंदा कारतूस बरामद हुए थे। जांच के दौरान, साजिश से जुड़े पाकिस्तानी आतंकवादियों को गिरफ्तार किया गया और स्थानीय सपोर्ट नेटवर्क के सदस्यों की पहचान व उनकी कथित भूमिकाओं का भी पता लगाया गया।