सीआरपीएफ कैंप पर बुधवार को हुए आत्मघाती हमले में शामिल आतंकियों को पनाह देने के आरोप में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने सरकारी मुलाजिम परनदीप सिंह को गिरफ्तार कर लिया है।
सूत्रों के मुताबिक उत्तरी कश्मीर के टंगमर्ग में परनदीप के घर पर ही 11 मार्च को सभी हमलावरों और उनके मददगारों की मीटिंग हुई थी। इसके बाद उन्हें श्रीनगर के टंकीपोरा इलाके में ले जाया गया।
माना जा रहा है कि पुलिस के स्पेशल आपरेशन ग्रुप ने हमले के सारे तार करीब-करीब जोड़ लिए हैं। परनदीप आत्मघाती हमले के बाद से फरार चल रहा था। उसे शनिवार सुबह गिरफ्त में लिया गया।
उसका नाम लश्कर-ए-ताइबा आतंकी और उड़ी निवासी बशीर अहमद उर्फ हारून भाई से पूछताछ में सामने आया था। इस मामले में बशीर से पूछताछ के बाद 22 वर्षीय जुबैर उर्फ अबू तल्ला उर्फ रियाज को श्रीनगर के छत्ताबल से गिरफ्तार किया गया था।
पूछताछ में जुबैर ने बताया है कि उसने बशीर के साथ दो आत्मघाती हमलावरों को सीआरपीएफ कैंप के पास तक पहुंचाया था। इससे पहले बशीर ने सीआरपीएफ कैंप की रेकी की थी।
पूछताछ में इन आतंकियों ने जांच एजेंसियों को बताया है कि इस महीने के शुरू में उड़ी सेक्टर से लश्कर के पांच आतंकी भारतीय सीमा में दाखिल हुए थे। इनमें से दो वापस लौट गए थे, जबकि तीन श्रीनगर की ओर बढ़ गए थे।
हालांकि खुफिया एजेंसियां आतंकियों के इन दावों पर भरोसा नहीं कर रही हैं। एजेंसियों का मानना है कि आतंकी पहले से ही भारत में छिपे हुए थे क्योंकि उड़ी सेक्टर से फरवरी महीने में किसी तरह की घुसपैठ की कोई खुफिया सूचना नहीं है।
ऐसे में एजेंसियां मान रही हैं कि कहीं ये दोनों आतंकी गलत बयान देकर घाटी में ही सक्रिय मॉड्यूल पर पर्दा डालने की कोशिश तो नहीं कर रहे।
मालूम हो कि सीआरपीएफ कैंप पर हुए हमले में सीआरपीएफ के पांच जवान शहीद हो गए थे। इस बीच परनदीप की पत्नी ने अपने पति के बचाव में दावा किया है कि आतंकी बंदूक दिखाकर जबरन घर में घुस आए थे।
सीआरपीएफ कैंप पर हमले की जांच में अहम सुराग जुटा लिए गए हैं। इस हमले की साजिश रचने वाले इसे अंजाम देने में मदद करने वाले लोगों की पहचान कर ली गई है।
सुशील कुमार शिंदे, गृह मंत्री