उसकी ओर से दो जमानत याचिकाएं दी गई थीं। एक नियमित जमानत के लिए और दूसरी वैधानिक जमानत के लिए। उस पर यूएपीए और आर्म्स एक्ट के तहत अपराध दर्ज हैं। एनआईए के मुख्य जांच अधिकारी डीएसपी अंकित रोहिल्ला ने अर्जी का कड़ा विरोध किया। कहा कि जांच अभी भी चल रही है। मामले से जुड़ी सामग्री एकत्र की जा रही है। कोर्ट ने कहा कि जांच जारी है और निर्धारित समय के भीतर चार्जशीट फाइल करने के लिए बस कुछ ही दिन बचे हैं। उसने अर्जी को समय से पहले मानते हुए खारिज कर दिया।
शाह ने चार्जशीट तय समय में फाइल न किए जाने को आधार बनाते हुए वैधानिक जमानत अर्जी भी दाखिल की थी। लेकिन कोर्ट ने कहा कि अपराध यूएपीए के तहत आता है, इसलिए अभियोजन के पास चार्जशीट फाइल करने के लिए 90 दिन हैं, जिसे 180 दिन तक बढ़ाया जा सकता है। यह समय अभी खत्म नहीं हुआ है। कोर्ट ने इस अर्जी को भी समय से पहले और बेबुनियाद बताया।
वर्तमान मामला 17 जुलाई, 1996 को श्रीनगर के नाज क्रॉसिंग पर हुई एक घटना से जुड़ा है। कोर्ट में एनआईए के स्टैंड के मुताबिक, शब्बीर शाह समेत हुर्रियत कार्यकर्ताओं की अगुवाई वाली भीड़ एक जुलूस के दौरान हिंसक हो गई। भारत विरोधी नारे लगाए गए। पत्थरबाजी की गई। यातायात बाधित करने के साथ ही सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। इतना ही नहीं, भीड़ में से कुछ लोगों ने पुलिस पार्टी पर जान से मारने के इरादे से गोली भी चलाई।
वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये पेश हुआ शाहएनआईए की रिमांड अर्जी पर शब्बीर अहमद शाह को जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये पेश किया गया। केस डायरी देखने और अभियोजन की बात सुनने के बाद कोर्ट ने उसे 14 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेजने के निर्देश दिए।
सेंट्रल जेल में हर 48 घंटे बाद होगी जांच
कोर्ट ने शब्बीर अहमद शाह को जम्मू की कोट भलवाल स्थित सेंट्रल जेल में रखने के निर्देश दिए। कहा कि नियमों के अनुसार हर 48 घंटे में उसकी मेडिकल जांच की जाए।