राज्य में सैन्य शिविरों और बिजली प्रोजेक्टों पर फिदायीन हमले का खतरा मंडरा रहा है। लश्कर-ए-ताइबा ने फिर से उत्तरी कश्मीर में अपनी पैठ बना ली है। उत्तरी कश्मीर में पाकिस्तान के लगभग 100 प्रशिक्षित आतंकी हैं, जिनमें चार ग्रुप को फिदायीन दस्ता माना गया है। इन चार ग्रुपों में 16 आतंकी हैं। नियंत्रण रेखा के उस पार से लश्कर के फिदायीन दस्तों की घुसपैठ की कोशिशें भी लगातार जारी हैं।
सुरक्षा एजेंसियों को इनपुट मिले हैं कि बांदीपोरा में सीआरपीएफ कैंप पर फिदायीन हमला नाकाम कर दिए जाने के बाद आतंकी संगठन बड़े हमले की रणनीति पर काम कर रहा है। इस बाबत रेड अलर्ट जारी किया गया है। सीजफायर उल्लंघन की आड़ में पीओके से 20 आतंकी पिछले दिनों घुसपैठ में सफल रहे हैं। इससे सुरक्षा बलों की चुनौती बढ़ गई है।
सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों का कहना है कि आतंकियों की बातचीत के कुछ फोन रिकॉर्ड किए गए हैं। कुछ संदेशों को पकड़ा गया है। अब लश्कर-ए-ताइबा कश्मीर में बिजली प्रोजेक्टों और जम्मू में सैन्य शिविरों पर हमले की तैयारी कर रहा है।
उड़ी में बिजली प्रोजेक्ट पर हमले की साजिश के इनपुट मिलने के बाद सीआईएसएफ ने रेड अलर्ट जारी कर सुरक्षा बढ़ा दी है। नब्बे के दशक के बाद आतंकी संगठन ने डोडा और किश्तवाड़ के इलाकों में भी अपनी मौजूदगी दर्ज की है। इस बाबत चिनाब घाटी के बिजली प्रोजेक्टों की भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है।