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जम्मू: कठुआ-उधमपुर रेंज में 21 जगहों की सुरक्षा का जिम्मा सीआरपीएफ के हवाले, कोबरा की नौ टीमें भी होंगी तैनात

Tue, 08 Sep 2026 02:20 AM IST
Digvijay Singh अमर उजाला ब्यूरो, जम्मू

सार

जम्मू संभाग में घने जंगल वाले जिलों में आतंकी गतिविधियां बढ़ने के बीच सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। कठुआ-उधमपुर रेंज के 21 संवेदनशील और प्रमुख स्थानों की सुरक्षा का जिम्मा अब सेना की जगह केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) को सौंप दिया गया है।
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सीआरपीएफ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जम्मू संभाग में घने जंगल वाले जिलों में आतंकी गतिविधियां बढ़ने के बीच सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। कठुआ-उधमपुर रेंज के 21 संवेदनशील और प्रमुख स्थानों की सुरक्षा का जिम्मा अब सेना की जगह केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) को सौंप दिया गया है। इसके अतिरिक्त, जंगलों और दुर्गम क्षेत्रों में अभियान की मारक क्षमता को और मजबूत करने के लिए कोबरा की नौ विशेष टीमें भी तैनात की जाएंगी। ये एक अहम रणनीतिक बदलाव है।

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कठुआ और उधमपुर के पहाड़ी एवं घने जंगलों से घिरे इलाकों में पिछले कुछ वर्षों में बढ़ी आतंकी गतिविधियां सुरक्षा बलों के लिए बड़ी चुनौती बनीं हैं। उधमपुर के डुडू-बसंतगढ़ से लेकर कठुआ के बिलावर और मच्छेड़ी सेक्टर तक हाल के दिनों में कई मुठभेड़ें हुई हैं। आतंकी मारे गए हैं  लेकिन दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण इन क्षेत्रों में अभियान चलाना हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहा है। इस चुनौती से अधिक प्रभावी ढंग से निपटने के लिए अब इन इलाकों में सीआरपीएफ की तैनाती की जा रही है।

प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की ओर से उठाए गए इस कदम का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में सुरक्षा बलों की भूमिका को अधिक प्रभावी और संतुलित बनाना है। ऐसे में अब सीआरपीएफ स्थानीय स्तर पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने, महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की निगरानी करने और नियमित सुरक्षा जांच का काम देखेगी। इस फेरबदल से भारतीय सेना को स्थानीय सुरक्षा दायित्वों से राहत मिलेगी। सेना अब मुख्य रूप से सीमा सुरक्षा, नियंत्रण रेखा की निगरानी और आतंकवाद विरोधी अभियानों पर अपना ध्यान केंद्रित कर सकेगी।
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पिछले साल बल मुख्यालय की ओर से जारी दिशा निर्देशों में कहा गया था कि ऐसे कार्मिक, जिनका तबादला, उक्त बटालियनों में हुआ है, उन्हें संबंधित यूनिटों से बिना किसी देरी के रिलीव कर दिया जाए। लंबे समय से आतंकियों के खिलाफ अभियानों में शामिल रहे आर्मी, आईबी एवं पुलिस के अधिकारियों की ओर से सीआरपीएफ की उक्त बटालियनों के जवानों एवं अफसरों को प्री इंडक्शन ट्रेनिंग दी गई है।

लंबे समय से चल रहा था काम
सीआरपीएफ को यह जिम्मेदारी अचानक नहीं मिली है। इस दिशा में लंबे समय से एरिया ऑफ रिस्पांसिबिलिटी के तहत काम चल रहा था। चार-पांच वर्ष पहले राष्ट्रीय राइफल की मारक क्षमता में सीआरपीएफ को लाने के बारे में विचार किया गया था। इस बाबत रक्षा विशेषज्ञों, सेना और सीआरपीएफ के अलावा जम्मू कश्मीर पुलिस के वरिष्ठ अफसरों की राय ली गई और उसके बाद ही प्रपोजल पर आगे बढ़ा गया। इस तरह सीआरपीएफ को सेना के ऑपरेशन पैटर्न पर आगे बढ़ाए जाने की रणनीति को मंजूरी दी गई। इसके बाद सीआरपीएफ के चयनित जवानों और अधिकारियों को सेना, खुफिया ब्यूरो तथा पुलिस के अनुभवी अधिकारियों से प्री-इंडक्शन प्रशिक्षण दिलाया गया।

सीआरपीएफ की ये तीन बटालियन तैनात
सीआरपीएफ की 24वीं, 121वीं और 187वीं बटालियनों को सेना के नियंत्रण वाले 21 संवेदनशील स्थानों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन बटालियनों में आतंकरोधी अभियानों के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित जवान और अधिकारी शामिल हैं।

बदलाव पर लंबे समय से मंथन चल रहा था। यह प्रभावी कदम है। सेना का काम अंदरूनी सुरक्षा संभालना नहीं है। जब देश का लक्ष्य गुलाम कश्मीर को वापस लाने जैसा बड़ा है तो सेना को काउंटर इंटेलिजेंस जैसे कामों में लंबे समय तक लगाए रखना उचित नहीं होगा। पिछले काफी समय से सेना पुलिस और सीआरपीएफ को प्रशिक्षण दे रही है और उन्हें हर परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार किया जा रहा है। जिम्मेदारी के इस बंटवारे से सेना अपने बड़े लक्ष्य पर ज्यादा प्रभावी तरीके से काम कर सकेगी।

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