केंद्र शासित प्रदेश बनने से राज्य के वकीलों को बड़ा नुकसान हुआ है। सीधे तौर पर न्यायिक व्यवस्था से रजिस्ट्र्रेशन को एग्जीक्यूटिव के पास शिफ्ट कर दिया गया है। जो वकीलों की आय पर हमला है। वकीलों का मानना है कि इससे न सिर्फ भ्रष्टाचार बढ़ेगा और आम पब्लिक को नुकसान होगा।
बल्कि वकीलों की आय भी नहीं बचेगी। पहले ही यह एक सीमित राज्य है। केंद्र शासित प्रदेश बनने से अब केंद्र का एक्ट लागू होगा। जिसके तहत रजिस्ट्रेशन एग्जीक्यूटिव मैजिस्ट्रेट के पास होता है।
जम्मू की बार एसोसिएशन ने बुधवार को इसे लेकर कामकाज ठप रखा। साथ ही एग्जीक्यूटिव कमेटी की बैठक हुई। बैठक में निर्णय लिया गया कि लेफ्टिनेंट गवर्नर और चीफ जस्टिस से वकीलों का दल मिलेगा। 14 नवंबर को दोबारा बैठक करके अगली रणनीति तैयार करेंगे। बार एसोसिएशन के उप प्रधान रोहित भगत का कहना है कि इससे वकीलों की आय पर बहुत फर्क पड़ेगा।
वह चाहते हैं कि रजिस्ट्रेशन बेशक एग्जीक्यूटिव मैजिस्ट्रेटों के पास रहे। लेकिन रजिस्ट्र्र्रेशन अदालत परिसर में ही हो। यहां पर पहले से सेटअप तैयार हैं। एग्जीक्यूटिव मैजिस्ट्रेट अदालतों में ही बैठें। कोई भी रजिस्ट्रेशन करे, अदालतों में करे। एसोसिएशन के महासचिव अभिषेक वजीर का कहना है कि लिटिगेशन पहले ही बहुत सीमित है। रजिस्ट्रेशन शिफ्ट होने से तो वकीलों का काम ही खत्म हो जाएगा।
आय का कोई साधन नहीं रहेगा। इससे सिर्फ हम पर असर ही नहीं पड़ेगा। बल्कि आम पब्लिक पर भी असर पड़ेगा। वह लोग अपनी बात चीफ जस्टिस के समक्ष रखेंगे।