पहले भी तस्करी करते पकड़े गए हैं यहां के लोग
राजोरी। जिले के नौशेरा सब-डिवीजन की भवानी पुलिस चौकी के अंतर्गत आने वाले सेर और मकड़ी गांव लंबे समय से क्रॉस बॉर्डर नारको टेररिज्म के केंद्र रहे हैं। ये गांव नियंत्रण रेखा (एलओसी) के करीब स्थित हैं और घुसपैठ रोधी बाधा प्रणाली (एआईओएस) के आगे पड़ते हैं, जिसे आमतौर पर एलओसी बाड़ कहा जाता है। पाकिस्तान से आने वाली नशीली दवाओं की तस्करी के लिए यह इलाका हमेशा संवेदनशील रहा है।
पहले भी हो चुकी हैं बड़ी गिरफ्तारियां
इन गांवों में पहले भी ड्रग तस्करों की धरपकड़ हुई है:
- अप्रैल 2024 : सेना और पुलिस ने 3 कुख्यात तस्करों को गिरफ्तार कर 8.5 किलोग्राम हेरोइन बरामद की थी।
- उनकी निशानदेही पर: एक और तस्कर पकड़ा गया, जिसके पास से 1.5 किलोग्राम हेरोइन और 3 वाहनों को जब्त किया गया था।
- इस अभियान में वीडीसी (विलेज डिफेंस कमेटी) सदस्यों ने अहम भूमिका निभाई थी।
पंजाब पुलिस की ओर से गिरफ्तार तस्कर सिकंदर का खुलासा
- सेर गांव के निवासी सिकंदर को पंजाब पुलिस ने नंगल क्षेत्र से गिरफ्तार किया था।
- पूछताछ में सिकंदर ने अपने परिजन मंज़ूर अहमद (निवासी सेर) और अन्य तस्करों के साथ राजोरी, जम्मू-कश्मीर और पंजाब में ड्रग तस्करी की बात कबूल की।
- पुलिस ने सेर गांव में उसके घर से 29 लाख रुपये बरामद किए थे।
- मंजूर के घर पर छापेमारी में 1,64,70,600 रुपये की नकदी जब्त की गई थी और बाद में मंजूर को गिरफ्तार कर लिया गया।
पाकिस्तान से जुड़े नारको टेररिज्म की पुष्टि
इन मामलों की जांच में स्पष्ट हुआ है कि पाकिस्तान से हेरोइन की तस्करी इन गांवों के माध्यम से की जा रही थी। सुरक्षा एजेंसियां लगातार इन तस्करी नेटवर्क्स पर कड़ी निगरानी रख रही हैं और कार्रवाई जारी है। राजोरी पुलिस और सेना ने नारको टेररिज्म के खिलाफ अभियान छेड़ रखा है और भविष्य में और भी कड़े कदम उठाने की योजना बना रही है।