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मौत के साए में जी रहे उढ़ीपुरा के ग्रामीण

Sun, 05 Oct 2014 04:28 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/ राजोरी
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पिछले तीन दिनों से जिले के सावजियां क्षेत्र में जारी पाक सेना की भीषण गोलाबारी से क्षेत्र के गांव उढ़ीपुरा का कोई घर ऐसा नहीं होगा जिसे पाक सेना के गोलों से क्षति न पहुंची हो। तीन- चार सौ घरों वाले इस गांव के हर घर में पाक सेना की गोलाबारी के निशान हैं। जिससे ग्रामीण मौत के साए में जी रहे हैं।
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गांव के लोगों का यही कहना है कि पाक सेना ने तो हमें ऊपर भेजने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी, लेकिन खुदा ने ही हमें बचा लिया है। पाक सेना की गोलाबारी से तबाह हुए घर के सामान और घर के अंदर जिंदा पडे़ पाक गोले दिखाते ग्रामीणों की आंखों से आंसू निकल आते हैं। गांव में हुई गोलाबारी के बाद किसी प्रकार का जानी नुकसान न होना लोगों को किसी चमत्कार से कम नहीं लगता है क्योंकि जिस समय गोलाबारी हुई उस समय अधिकतर लोग जान बचाने के लिए घरों के अंदर सबसे नीचे सबसे सुरक्षित माने जाने वाले स्थानों पर छिप गए थे और गोलों के टुकडे़ वहां तक भी पहुंचे हैं।

इतना ही नहीं गांव उढ़ीपुरा निवासी मोहम्मद आरिफ के परिवार को तो गांव का सबसे खुश नसीब परिवार माना जा रहा है। जिसके परिवार के आठ दिन के बच्चे सहित पांच सदस्यों के मात्र कुछ इंच की दूरी पर पाक गोला फटा, जिससे उनके बिस्तर, तकियों और चारपाई के टुकडे़ टुकडे़ हो गए, लेकिन किसी सदस्य को खरोंच तक नहीं आई है।
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आरिफ के पड़ोसी मंजूर हुसैन का कहना है कि शुक्रवार को जब पाक सेना ने गोलाबारी शुरू की तो सब लोग अपने घरों में सबसे नीचे बनाए गए स्थानों पर चले गए। आरिफ की पत्नी बरवीन बेगम को आठ दिन पहले बेटा पैदा हुआ था वह भी अपने घर के तहखाने में बिस्तर बिछा कर उसमें छुप गए ताकि धमाकों की आवाज से नवजात को कुछ न हो जाए। इस बीच एक गोला उनके तीन छतों को भेदता हुआ पास आ गिरा, जिससे वह सभी बेहोश हो गए।

इसके बाद  आधे घंटे बाद उन्हें धुल मिटटी में सने हुए बेहोशी की हालत में बाहर निकाला। ग्रामीणों का कहना है कि गोलाबारी थमते ही भारतीय सेना के जवान व अधिकारी आ पहुंचे और हमारा हालचाल जाना। लेकिन आज तीन दिन से जारी गोलाबारी में कोई अधिकारी या नेता नहीं आया।
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