पीओजेके विस्थापित परिवारों की बेटियों ने सरहद पर तैनात जवानों की कलाई पर बांधी रेशम की डोर
संवाद न्यूज एजेंसी
राजोेरी। रक्षाबंधन के अवसर पर पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) से विस्थापित होकर बसे परिवारों की बेटियों ने देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे सुरक्षा बलों के जवानों के साथ भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को मजबूत करते हुए अनूठी मिसाल पेश की। इन बेटियों ने इस वर्ष अपने हाथों से 1,000 से अधिक राखियां तैयार कीं और एलओसी पर पहुंचकर सुरक्षा कर्मियों की कलाइयों पर रक्षा सूत्र बांधे।
रक्षाबंधन के मौके पर बड़ी संख्या में बेटियां एलओसी के अग्रिम क्षेत्रों में पहुंचीं, जहां उन्होंने सीमा पर तैनात जवानों को राखियां बांधकर उन्हें त्योहार की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान जवानों ने भी इन बेटियों को अपना स्नेह और आशीर्वाद दिया। सीमा क्षेत्र में रक्षाबंधन का यह दृश्य भावनात्मक होने के साथ-साथ देशभक्ति और भाईचारे की भावना से ओतप्रोत नजर आया।
इन बेटियों ने बताया कि उन्होंने कई दिनों की मेहनत से 1,000 से अधिक राखियां हाथ से तैयार कीं। उनका उद्देश्य केवल रक्षाबंधन मनाना नहीं, बल्कि उन जवानों को यह एहसास कराना था कि देश की रक्षा करते समय वे अपने परिवारों से दूर जरूर हैं, लेकिन देश की बहनें और बेटियां उनके साथ खड़ी हैं।
बेटियों ने कहा, ये जवान अपने घरों से सैकड़ों किलोमीटर दूर रहकर हमारी सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं। रक्षाबंधन के दिन उन्हें अपनी बहनों की कमी महसूस न हो, इसलिए हम यहां राखी बांधने आए हैं। हम चाहते हैं कि जवानों को महसूस हो कि उनकी बहनें उनके साथ हैं।
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सेना के जवानों को राखियां बांधकर पर्व को मनाया
नौशेरा। सबडिवीजन की सीमावर्ती क्षेत्र के नजदीक स्थित सरकारी बॉयज मिडिल स्कूल सरया ने भारतीय सेना की 24 सिख रेजिमेंट के साथ मिलकर रक्षा बंधन का पवित्र त्योहार बड़े जोश, प्यार और देशभक्ति की भावना के साथ मनाया। इस मौके पर, स्कूल के विद्यार्थियों ने देश की सेवा करने वाले बहादुर सैनिकों के प्रति अपना सम्मान, आभार और प्यार दिखाते हुए एक सैन्य जवान को राखी बांधी। इस कार्यक्रम ने भाईचारे, एकता और देशभक्ति के पवित्र बंधन को खूबसूरती से दिखाया। स्कूल प्रशासन ने विद्यार्थियों के लिए सेलिब्रेशन को यादगार बनाने में उनके कीमती सहयोग और सहयोग के लिए 24 सिख रेजिमेंट और भारतीय का दिल से धन्यवाद किया। सैनिकों के साथ बातचीत ने बच्चों को हमारे आर्म्ड फोर्सेज़ के डेडिकेशन और बलिदान को समझने और उनकी तारीफ करने का एक इंस्पायरिंग मौका दिया। संवाद