ज्ञान गंगा आश्रम में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा का चौथा दिन
स्वामी विश्वात्मानंद सरस्वती महाराज ने संगत को प्रवचनों से किया निहाल
संवाद न्यूज एजेंसी
राजोरी। सब कुछ होते हुए भी अगर स्वभाव अच्छा नहीं है तो उसका कुछ नहीं हो सकता है। व्यक्ति का स्वभाव देख के पता चल जाता है कि वह सुखी है या दुखी। जिस व्यक्ति को तृप्ति नहीं है, उसे संसार का सब कुछ प्रदान कर दो तो भी वह संतुस्ट नहीं होगा। यह प्रवचन शनिवार को ज्ञान गंगा आश्रम में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन अटल पीठाधीश्वर राजगुरु आचार्य महामंडलेश्वर श्रीश्रीश्री 1008 स्वामी विश्वात्मानंद सरस्वती महाराज ने संगत को दिए।शनिवार को श्री कृष्ण जन्म लीला महोत्सव, राजा बलि का ताप, रामजी की लीलाएं, गृहस्थ आश्रम का धर्म, वामन अवतार, कशप अवतार, महाशय अवतार आदि का वर्णन किया गया।
स्वामी ने वामन और राजा बलि का प्रसंग वर्णन करते हुए कहा कि जिसने परमात्मा को मन में बसा लिया, उसे परम सुख की प्राप्ति होती है। इस संसार में कोई किसी का नहीं होता । परमात्मा से नाता जोड़कर ही इस भवसागर से पार पाया जा सकता है। हरि नाम का सुमिरन करने के लिए कल का इंतजार नहीं करना चाहिए। जीवन में सुख-दुख की लहर के लिए बृजवासियों को गिरिराज की पूजा करने के लिए प्रेरित किया और इंद्र के प्रकोप से बचाने के लिए अपनी उंगली पर गिरिराज को धारण कर समस्त बृजवासियों को बचाया। कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को कर्म के माध्यम से जीवन में अग्रसर रहना चाहिए। इस अवसर पर काफी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उपस्थित रही।