शमीम को उपलब्धि पर मिठाई खिलाते परिजन
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राजोरी। सामान्य गुज्जर परिवार की इरमिम शमीम ने विषम आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद हौसला नहीं खोया और ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (एम्स) की प्रवेश परीक्षा पास कर साबित कर दिया कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती।
जम्मू संभाग के सीमावर्ती जिले के धनौर गांव की निवासी शमीम ने जून माह में प्रवेश परीक्षा में हिस्सा लिया था। बताते हैं कि वह जहां रहती थी वहां अच्छा स्कूल न होने के कारण उसे रोज 10 किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाना पड़ता था।उसकी यही लगन उसे आज इस मुकाम तक ले गई।
शमीम के चाचा लियाकत चौधरी कहते हैं कि शमीम की सफलता राज्य की दूसरी लड़कियों के लिए प्रेरणा बनेगी। इस बच्ची ने विपरीत परिस्थितियों में जिस प्रकार संघर्ष अपना मुकाम हासिल किया उसने परिवार की इज्जत बढ़ा दी।
सपना सच होने जैसा
वहीं शमीम का कहना है कि उन्होंने कभी यह नहीं सोचा था कि एम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में पढ़ने का अवसर मिलेगा। शमीम का कहना है कि वह अब मेडिकल पढ़ाई में और अधिक मेहनत करेगी, जिससे माता -पिता और राज्य के लोगों का नाम रोशन कर सके।